पेपरलेस के दावे फेल, ऑनलाइन करने में 6 करोड़ रुपए खर्च पर स्टेशनरी का अब भी खर्चा जस का तस

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लोगों की सुविधा के लिए लगभग सभी शासकीय प्रशासनिक, शैक्षणिक और अन्य संस्थाओं में ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था की गई है। करोड़ों रुपए की लागत से सॉफ्टवेयर तैयार किया गया, एजेंसी तय की गई। फिर भी लोगों को राहत नहीं मिली। उन्हें ऑनलाइन आवेदन के साथ ऑफलाइन प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ रहा है। इस तरह दोहरा खर्च हो रहा है। समय की भी बचत नहीं हो रही।

विभिन्न एजेंसियों पर अभी तक कम से कम 6 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। फिर भी आवेदनों में सिर्फ हार्डकॉपी के नाम पर हर महीने कम से कम 1.08 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। इस तरह अभी भी काम पेपरलेस के स्थान पर पेपरलैस ही हो रहा है। इन दिनों अस्पताल में मरीजों का पंजीयन, विश्वविद्यालयों से संबद्ध महाविद्यालयों में प्रवेश, नामांकन, परीक्षा के कार्य, छात्रवृत्ति के लिए आवेदन, जमीन की रजिस्ट्री, ईपीएफ, ईएसआईसी के आवेदन, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र साथ लोगों की मूलभूत जरूरतों जैसे बिजली, पानी और सड़क संबंधी आवेदनों को ऑनलाइन किया गया है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा है।

  • 1.51 करोड़ की लागत से जिला अस्पताल में बनाया ऑनलाइन सिस्टम
  • 2.68 करोड़ की लागत से हेमचंद और सीएसवीटीयू में दिया गया काम
  • 1.54 करोड़ की लागत से नगरीय निकायों में लगाए ऑनलाइन सिस्टम
  • 1.08 करोड़ रुपए से ज्यादा के पेपर हर महीने दफ्तरों में अलग से लग रहे

मरीजों का ऑनलाइन नहीं रखा जा रहा रिकार्ड

जिला अस्पताल में वर्ष 2014 में यूरोपियन परिषद से मिले 2 करोड़ में से 1.51 करोड़ रुपए की लागत से मरीजों के ऑनलाइन पंजीयन के लिए सिस्टम बनाए गए है। कम्प्यूटर लगाकर सभी पेपर वर्क को खत्म करना था। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है।

निदान एप पर कम्प्लेन दर्ज कराई, जनदर्शन में भी आवेदन
निकायों से जुड़ी जन समस्याओं को लेकर लोगों को दफ्तरों में जाकर आवेदन नहीं देने पड़े। ऐसे में पेपर लेस वर्क के लिए निदान 1100 तैयार किया गया। चारों निकायों से रोजाना करीब 210 कंपलेन दर्ज हो रहे हैं। इसके लिए आवेदन लिए जा रहे हैं।

ईएसआईसी में सब कुछ वेबसाइट पर, फिर भी पेपर मांग रहे
राज्य कर्मचारी निगम की वेबसाइट पर बीमित कर्मचारी को पूरा डाटा जैसे उसका पूरा ब्यौरा, बेनीफिट और कंट्रीब्यूशन डिटेल, फिर भी मरीज से सभी दस्तावेजों की हार्ड कॉपी मांगी जाती है। इसके बाद ही आवेदन की प्रक्रिया हो रही है।

सीपीएफ लोन के लिए ऑनलाइन आवेदन, फिर भी ले रहे हार्डकॉपी
बीएसपी में कई विभागों में अभी भी इसका पालन नहीं हो रहा। इनमें से सीपीएफ लोन की प्रक्रिया भी शामिल है। आवेदक को इंटरनेट में ई सहयोग की सहायता से आवेदन करने की प्रक्रिया है। साथ ही मैनुअली भी आवेदन जमा करना होता है।

भुईंया पोर्टल में गलत ब्यौरा दिए जाने की भरमार
भुंईया पोर्टल में खसरा, बी वन, पी-2 खतौनी के लिए ऑनलाइन सुविधा शुरू की गई। हाल यह है कि लोगों को पोर्टल में ब्यौरा त्रुटिपूर्ण है। मोहलई निवासी भूपेन्द्र साहू के पिता के नाम तीन अलग-अलग खसरा नंबर की जमीन है। ऑनलाइन जानकारी नहीं मिल पाती।

विवि में एजेंसी तय, फिर भी हार्ड कॉपी मांग रहे
तकनीकी विवि हो या फिर हेमचंद विवि, बच्चों से ऑनलाइन प्रवेश लिया गया। नामांकन की प्रक्रिया चली रही है। 10वीं और 12वीं की अंकसूची के साथ चरित्र प्रमाण पत्र और आवेदन की हार्ड कापी मांगी जा रही है। इसके आधार पर प्रक्रिया होती है।

जानिए कैसे हो रहा 1.08 करोड़ का खर्च
बीएसपी में हर महीने 1500 आवेदन आ रहे हैं। दोनों विवि में 52 हजार सीटों में प्रवेश दिया गया है। 40 अस्पतालों में हर दिन 1200 से 1300 मरीज आ रहे हैं। ईएसआईसी के हर दिन 10-12 आवेदन हैं। निगम में 5500 आवेदन जमा हो रहे हैं। प्रत्येक आवेदन में औसत 5 पेपर लगते हैं। स्टेशनरी कारोबार हरेंद्र बघेल का कहना है कि सालभर में 1.08 करोड़ रुपए पेपर पर खर्च हो रहे।

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ऑनलाइन आवेदन में अक्सर त्रुटियां हो जाती हैं, मंगाते हैं हार्ड कॉपी

लोगों की सुविधा के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा है, फिर भी हार्डकॉपी क्यों मंगाए जा रहे हैं?
ऑनलाइन आवेदनों में अक्सर त्रुटियां हो जाती है। उसे सुधारने के लिए हॉर्डकॉपी मंगाते हैं।

ऐसे में उसके पेपर लेस के उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो पा रही है?
ऐसी बात नहीं है। आवेदनों के पोर्टल में फीडबैक का ऑप्शन होता है। इसमें शिकायत कर सकते हैं। उनका निराकरण भी होता है।

भुईंया पोर्टल जमीन की सही जानकारी नहीं मिल पा रही है?
पोर्टल में दिक्कतें आईं थी। उसे सुधरवाया जा रहा है।

अन्य विभागों में भी दिक्कतें इसी तरह की सामने आ रही हैं?
उन्हें भी देख रहे हैं। शिकायतें आने पर सुधार करेंगे।