दुर्ग में एक कंप्यूटर दुकान संचालक के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। अज्ञात व्यक्ति एक कंपनी का कर्मचारी बनकर दुकान संचालक के पास पहुंचा और 3 लाख 34 हजार के कंप्यूटर लेकर रफूचक्कर हो गया। जब दुकान संचालक ने कंपनी में फोन कर डिलीवरी की कन्फर्मेशन ली तो पता चला कि वहां से कोई कर्मचारी भेजा ही नहीं गया। इसके बाद दुकान संचालक दुर्ग के कोतवाली थाने पहुंचा और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया।
कोतवाली टीआई भूषण एक्का ने बताया कि शंकर लाल साहबानी (43 वर्ष) इंदिरा मार्केट, सागर कांपलेक्स दुर्ग में ओडीसी कंप्यूटर नाम से दुकान चलाता है। दुकान में सभी कम्पनी के लैपटाप एवं डेस्कटॉप कंप्यूटर बेचे जाते हैं। उसका मनोज राजपूत लेआऊट प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी के साथ काफी समय से लेनदेन का कारोबार चलता है। कंपनी से मनोज राजपूत या उनके मैनेजर दीपक मारकण्डेय फोन पर आर्डर दे देते हैं तो उन्हें सामान की डिलीवरी दे दी जाती है। 12 नंवबर को 12:11 बजे शंकर के मोबाइल पर फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को दीपक माकण्डेय तथा मनोज राजपूत लेआऊट प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी का कर्मचारी बताया। फोन करने वाले ने 6 नग डेल एवं आसुस कम्पनी के लैपटाप का आर्डर दिया और बोला कि लैपटाप तैयार करके रखो मेरा आदमी आ रहा है। उसके बाद दोपहर करीब 1:54 बजे एक व्यक्ति आया। उसने बताया कि उसे मनोज राजपूत लेआऊट प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी से दीपक मारकण्डेय ने भेजा है। इसके बाद शंकर लाल ने 6 लैपटॉृप उसे दिए और 3 लाख 34 का बिल भी मनोज राजपूत लेआऊट प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी के नाम से बनाकर उस व्यक्ति को दे दिया। दूसरे दिन 13 नवंबर को जब शंकर ने अपने कर्मचारी घनश्याम को मनोज राजपूत लेआऊट प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी चेक लेने भेजा तो दीपक मारकण्डेय ने कोई भी आर्डर देने से इंकार किया। उसने कहा उनके पास कोई लैपटॉप भी नहीं आया है।
पुलिस लगा रही आरोपी का पता
शिकायत दर्ज होने के बाद दुर्ग पुलिस आरोपी का पता लगाने में जुट गई है। जिस नंबर से फोन करके कंप्यूटर का आर्डर दिया गया उसके लोकेशन और रजिस्टर्ड नाम का पता भी पुलिस लगा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपी अज्ञात है, लेकिन जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।