आजीविका बचाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रही कारगिल शहीद की पत्नी

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भिलाई। वर्ष 1999 में कारगिल में देश के लिए दुश्मनों से लड़ते हुए अपनी जान की कुर्बानी देने वाले शहीद कौशल यादव की पत्नी अपनी आजीविका को बचाने के लिए शासकीय दफ्तरों के चक्कर काट रही है।

दरअसल कौशल यादव के शहीद होने के बाद भारत सरकार ने उनकी पत्नी निशा यादव को आजीविका चलाने के लिए एक पेट्रोल पंप दिया था। जिससे वो अपना और अपने बेटे का भरण पोषण करती रही हैं। लेकिन, अभी पीडब्ल्यूडी ने उनके पेट्रोल पंप की ओर जाने वाले रास्ते के ठीक सामने डिवाइडर निर्माण करवा दिया है।

इसके चलते उनके पेट्रोल पंप का व्यापार लगभग आधा हो गया है। डिवाइडर खुलवाने के लिए वो शासकीय दफ्तरों के चक्कर काट रही है। ताकी पेट्रोल पंप का व्यापार फिर से पहले के जैसा हो जाए।

सरकार की तरफ से निशा यादव को पेट्रोल पंप तो मिला था। लेकिन, समय के साथ-साथ अन्य कार्य होने के बाद पंप मुख्य मार्ग से भीतर की तरफ चला गया। दुर्ग राजनांदगांव बाइपास का निर्माण होने के बाद बाइपास बनाने वाली कंपनी ने पेट्रोल पंप की तरफ जाने के लिए मार्ग नहीं दिया। लेकिन, सर्विस लेन की ओर जाने का रास्ता होने के कारण कुछ लोग पंप तक पहुंच पाते हैं।

वहीं बटालियन की ओर जाने वाले रास्ते से गुजरने वाले वाहनों के चलते पंप पर अच्छा कारोबार हो जाता था। लेकिन, हाल ही में पीडब्ल्यूडी ने वायशेप ओवरब्रिज से लेकर यातायात टावर तक सड़क का चौड़ीकरण करने के बाद डिवाइडर का निर्माण किया है। पूर्व में इसी मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालक ही इस पेट्रोल पंप तक चले जाते थे।

पंप की ओर जाने वाले रास्ते के ठीक सामने डिवाइडर बन जाने के कारण अब लोग सीधे निकल जाते हैं और बटालियन के पास स्थित पेट्रोल पंप से ईंधन ले लेते हैं। इससे शहीद कौशल यादव पेट्रोल पंप की बिक्री लगभग आधी हो गई है।

शहीद कौशल यादव की पत्नी निशा यादव ने बताया कि डिवाइडर बनने के पहले उनके पेट्रोल पंप से रोजाना आठ से 10 हजार लीटर डीजल व पेट्रोल की बिक्री होती थी। लेकिन, डिवाइडर बनने के बाद से ये बिक्री आधी हो गई है। इसके चलते वे पंप के कर्मचारियों और अन्य खर्च भी बड़ी मुश्किल से निकाल पा रही हैं।