खिलौने बनाने का शौक भिलाई की महिलाओं के लिए बड़ा स्टार्टअप साबित हुआ है। करीब छह महीने की मेहनत के बाद उनके द्वारा निर्मित सामान की डिमांड रायुपर, बिलासपुर, राजनांदगांव समेत प्रदेशभर से आ रही है। नतीजतन 8 से 10 महिलाओं का यह समूह हर महीने एक लाख रुपए तक की आमदनी कर रही हैं।
भिलाई निगम क्षेत्र अंतर्गत आराध्य महिला समूह संचालित है, जो खिलौना तैयार से लेकर उसका व्यवसाय करने का काम कर रहा है। संस्था की अध्यक्ष सरिता ने बताया कि टीवी और पेपर में महिलाओं के स्वावलंबी होने की कहानी सुना और पढ़ा करती थी। कुछ अलग करने की चाह हमेशा से रही थी। अब ग्रुप में आठ से 10 महिलाएं शामिल हो चुकी हैं।
डिमांड इतनी बढ़ी कि 10 हजार स्टॉक में रखने लगे
समूह की महिलाओं ने बताया कि इसके बाद 8-10 महिलाओं के माध्यम से खिलौना बनाकर स्थानीय स्तर पर विक्रय प्रारंभ किया। लेकिन सबसे बड़ी समस्या इसके विक्रय को लेकर थी, इसमें निगम प्रशासन ने सहयोग किया। उन्होंने कई स्थलों पर स्टाल भी उपलब्ध कराए और प्रचार होता गया। धीरे-धीरे अन्य जिलो में विक्रय प्रारंभ किया। इस समय टेडीबियर, गुड़िया, घोड़ा, डाग एवं गिलहरी जैसे आयटम की ज्यादा मांग है।
दुर्गा पूजा से मार्च तक रहती है ज्यादा डिमांड
स्व. सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि लगातार डिमांड बढ़ने से खिलौना बनाने में मशीन का भी उपयोग किया जा रहा है। इसकी वजह से हर माह में 80 हजार से लेकर 1 लाख राशि तक के खिलौने की बिक्री हो रही है। दुर्गा पूजा से लेकर मार्च माह तक के सीजन में ज्यादा डिमांड होती है। वहीं होल सेल बिक्री को उन्होंने ज्यादा प्राथमिकता दी है। साथ ही अब बेमेतरा, कवर्धा, धमतरी, राजनांदगांव एवं रायपुर जैसे शहरो में भिलाई में भी बेच रहीं हैं।
अपने साथ दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दे रहीं
समूह की महिलाओं का कहना है कि परिवार की आय में हाथ बंटाने की हमेशा से चाह थी। लेकिन ज्यादा पढ़ाई-लिखाई नहीं होने से हिम्मत टूट जाती थी। खिलौने बनाने के आइडिया ने उनकी जिंदगी बदलकर रख दी। इस काम के लिए उन्हें किसी के दफ्तर या गोदाम नहीं जाता पड़ता है। घर बैठे ही आर्डर के मुताबिक सामान तैयार कर देते हैं। छह महीने पहले चार महिलाएं थीं और अब 10 महिलाओं का ग्रुप हो गया। दूसरी महिलाओं को भी रोजगार मिला है।