भाजपा का घोषणा पत्र फिर एक चुनावी जुमला-ऋषि शास्त्री गरीबी,बेरोजगारी,मंहगाई और आर्थिक तंगी से निजात का विकल्प काँग्रेस के न्याय पत्र में-दल प्रवक्ता
राजनाँदगाँव:- लोकसभा चुनाव के पूर्व भाजपा ने अपना घोषणा पत्र जारी किया है जिसको लेकर काफी सारे सवाल खड़े हो रहे है जहां बीते दस सालों में देश का कर्ज तिगुना हो चुका है आम जनता को मंहगाई और आर्थिक तंगी की वजह से रोजाना की मूलभूत उपयोग में लाने वाली सामग्रियों के दुगने दाम देने पड़ रहे है ऐसे में भाजपा द्वारा की गई घोषणाओं में इसका कोई विकल्प नजर नही आरहा है बल्कि चुनाव के पूर्व भाजपा के इस कृत्य में प्रलोभन की सुदबुगाहट बस नजर आरही है जो आगे और भी घातक साबित हो सकती है।
भाजपा पिछले दस साल पूर्व मंहगाई,बेरोजगारी,गरीबी और आर्थिक तंगी का हवाला दे कर सत्ता में आई थी परंतु बीते दस साल में मंहगाई,बेरोजगारी,गरीबी और आर्थिक तंगी बेतहासा बढ़ कर दुगने स्तर तक जा पहुची है इसपर सत्ता से जुड़े लोगों के करीबी जो अर्थशास्त्र की खासा जानकारी रखते उन्होंने भी देश के लिये इसे घातक बताते हुए खतरे से आगाह किया है जब कि सत्तासिन भाजपा ने इसे दरकिनार करते हुए सत्ता में बने रहने को लेकर अपनी चुनावी घोषाणओ में वोट पाने के लिए हर बार की जुमलेबाजी पेश की है।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जो कि विश्व मे अर्थशास्त्र के जानकार के रूप में जाने जाते है जिन्होंने अपने कार्यकाल में मंहगाई,बेरोजगारी,गरीबी और आर्थिक व्यवस्था पर योजनाएं परिकल्पित कर कार्य किया जो देश में आई विकट परिस्थितियों से भी लड़ने की ताकत रखता था,पिछले दस सालों में केवल इन ताकतों को नए नए एक्सपेरिमेंट कर तोड़ने का प्रयास भाजपा ने किया जिसके कारण आज देशभर में परिणाम अभिश्राप बनकर जाल फैला रहा है।
जिन उद्देश्यो से कांग्रेस द्वारा अपना घोषणा पत्र जारी किया गया है निश्चित ही इस कठिन परिस्थिति से पार पाने की मजबूती की झलक योजनाओं के जरिये जाहिर हो रही है,काँग्रेस के न्याय पत्र के जरिये ही सभी वर्गों का उत्थान होना संभव है साथ ही गरीबी,मंहगाई,बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के फैल चुके जाल को भेद पाना संभव है,भाजपा ने सत्ता के दुरुपयोग से जिन चुनौतियों को पैदा किया है इनसे पार पाने के लिए कांग्रेस ही एक मात्र देश के लिए विकल्प शेष है।