विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली आपूर्ति के एवज में मनमानी शुरू कर दी गई है। इसे लेकर जिले में लगभग सभी जगहों पर उपभोक्ता खासे परेशान हैं। कोरोनाकाल में बिजली बिल जमा नहीं करने पर जिस तरह से कंपनी ने मेहरबानी की। अब कंपनी ने सख्ती बरतना शुरू कर दिया है। एक हफ्ते के अंदर ही दुर्ग-भिलाई के 579 बिजली उपभोक्ताओं के घरों की बिजली काट दी गई है।
उनसे करीब 1.50 करोड़ रुपए का बकाया कंपनी को वसूलना है। संक्रमण के इस दौर में अचानक हुई इस कार्रवाई के बाद उपभोक्ता अब कंपनी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। इतना ही नहीं ऑनलाइन बिजली बिल भुगतान की सुविधा भी सिरदर्द साबित हुई है। मोर बिजली एप शुरू करने के बाद यह परेशानी और बढ़ गई है। हालत यह है कि ननकट्टी के एक किसान को 2.26 लाख का बिजली बिल थमा दिया गया। इससे पहले उसके घर में 350 रुपए से ज्यादा का बिल कभी नहीं आया। बिजली कंपनी ने बकाया वसूली करने मुहिम शुरू कर दी है।
केस 1: 2.26 लाख से ज्यादा बिल किसान को थमा दिया
ननकट्ठी वितरण केंद्र के उपभोक्ता क्रमांक 1000556670 संजय कुमार को 2,26,870 रुपए का बिल ऑनलाइन भुगतान करने के लिए भेजा गया है। इस किसान का सितंबर महीने का बिल 330 रुपए आया था। हर महीने इस किसान को बिल 250 से 300 रुपए तक ही आता है। बिल को लेकर परिवार चक्कर लगा रहा है।
केस 2 : 4 हजार से लेकर 13 हजार तक का बिल भेज रहे
परसुली निवासी भागीरथी पटेल को सितंबर महीने में 13 हजार रुपए का बिजली बिल थमाया गया। इस महीने अक्टूबर का बिल 4 हजार रुपए भेजा गया है। इस उपभोक्ता द्वारा बिजली बिल सुधरवाने के लिए दफ्तर के चक्कर काटे गए लेकिन पूरा पैसा जमा करवा लिया गया। घर की औसत खपत हर महीने 1000 रुपए की रही है।
केस 3: 700 की जगह 3775 रुपए का ऑनलाइन बिल
चंद्रनगर निवासी पी निषाद के यहां हर महीने 700 रुपए का बिजली बिल आता है। पिछले महीने का बिल इस महीने घर पर भेजा गया है। वह 1030 है लेकिन ऑनलाइन में 3775 रुपए बिल है। इसे सुधरवाने के लिए दफ्तर जाने पर उसे सुरक्षा निधि होने की बात कहकर पूरा पैसा जमा करने कहा गया है।
सुरक्षा निधि व मीटर गड़बड़ी के नाम पर ठगे जा रहे उपभोक्ता, सुनवाई भी नहीं
सुरक्षा निधि के नाम पर इस महीने दुर्ग, भिलाई सहित 12 विद्युत वितरण केंद्रों के उपभोक्ताओं को ज्यादा बिल भेजे गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा निधि साल भर की बिजली की औसत खपत के आधार पर बढ़ाई जाती है। लेकिन जिस तरह से घरेलू उपभोक्ताओं से 4 हजार से लेकर 2.26 लाख रुपए से ज्यादा बिल भेजे गए हैं, यह गलत बिलिंग का नतीजा माना जा रहा है। टैरिफ में कथित रूप से छेड़छाड़ की भी बात सामने आ रही है। बिजली कंपनी के मुताबिक हर उपभोक्ताओं की बिलिंग के आधार पर अतिरिक्त सुरक्षा निधि की गणना की जा रही है। शिकायत पर सुनवाई भी नहीं हो रही है।
नए सिस्टम से बिलिंग की गई, इस वजह से दिक्कत
नए सिस्टम से बिजली बिलिंग शुरू की गई है। इसलिए टेक्नीकल दिक्कतों की वजह से कुछ लोगों के बिल गलत आ गए हैं। उसे सुधारा जा रहा है। जिन्हें बिल मिला है वो तत्काल आकर सुधरवा सकते हैं। सुरक्षा निधि 20 प्रतिशत बढ़ाई गई है, वह सालभर की खपत के आधार पर है। उसमें 4.25 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान कंपनी करती है।
-एके गाैराहा, अधीक्षण यंत्री ग्रामीण दुर्ग
10.63 करोड़ यूनिट हर माह खपत
- दुर्ग की डिमांड - 10.63 करोड़ यूनिट, खपत- 10.62 करोड़ यूनिट
- घरेलू व व्यवसायिक उपभोक्ताओं की खपत- 5.83 करोड़ यूनिट
- मोटर पंपों के जरिए खपत- 2.13 करोड़ यूनिट खरीफ फसल
- उद्योगों में खपत (एलटी)- 67 लाख यूनिट, उद्याेग (एचटी)- 2 करोड़ यूनिट