भिलाई-3 में 1998 से मिनी स्टेडियम के लिए प्रस्तावित जमीन पर काबिज 117 परिवारों को गुरुवार को स्थानीय प्रशासन ने बलपूर्वक हटाया। उन्हें उमदा में पीएम आवास योजना के तहत तैयार आवासों में शिफ्ट किया गया। कार्रवाई पाटन, अमलेश्वर, कुम्हारी और भिलाई-3 पुलिस के 110 जवान, 56 महिला पुलिस, 60 महिला कमांडो, निगम का अमला समेत 410 लोगों की टीम की मौजूदगी में की गई।
कार्रवाई के दौरान पूरे समय में मौके पर तनाव बना रहा। स्थानीय प्रशासन ने काबिज परिवारों को शिफ्ट करने के साथ ही पूरे 2.74 एकड़ क्षेत्र में बुलडोजर चला दिया। इस बीच कब्जेधारियों व प्रशासनिक टीम के बीच पूरे समय कहासुनी होते रही। कब्जेधारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भिलाई-3 स्थित आवास में पहुंचकर विरोध भी दर्ज कराया, लेकिन मौके पर कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। इधर कब्जेधारियों में कुछ युवाओं ने प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध किया। वे मौके पर डटे रहे। इस दौरान पुलिस बल राम मंदिर और नहर की ओर से धीरे-धीरे बढ़ने लगी। वहीं जनता स्कूल वाले छोर से भी दलबल के साथ निगम का अमला आगे बढ़ा। बिजली की आपूर्ति बंदकर दी गई थी।
- 110 परिवारों को वर्ष 1999 में किया गया था विस्थापित।
- 2.67 करोड़ रुपए लागत से बनेगा स्टेडियम।
- 131 परिवारों को मकान देने की तैयारी की गई
- सीएम के घर भी गए पर नहीं हुई सुनवाई
- कार्रवाई से पहले बंद कर दी गई थी बिजली
24 महीने में 21 नोटिस भेजा, अंतिम 3 दिन पहले
जमीन खाली कराने की कार्रवाई एकाएक नहीं की गई, बल्कि इसकी प्रक्रिया जनवरी 2020 से चल रही थी। फरवरी 2020 में पहला नोटिस दिया गया था। कार्रवाई के ठीक पहले कोरोना का संक्रमण आ गया। इसकी वजह से कार्रवाई रोक दी गई। हालांकि इस दौरान लगभग हर महीने निगम के कर्मचारी यहां कब्जा करके रहने वालों को नोटिस देते रहे। उनके स्वीकार नहीं करने पर उनके घरों या झोपड़ियों में चस्पा कर आते रहे। जनवरी 2021 से नोटिस जारी रहा। 3 दिन पहले अंतिम नोटिस दिया गया।
प्रशासनिक उदासीनता की वजह से बढ़ता गया कब्जा
1998 में लोगों को हटाने के बाद जमीन के एक हिस्से में काम हुआ, लेकिन दूसरे हिस्से को छोड़ दिया गया। 1999 की कार्रवाई में जिन लोगों को जमीन या मकान दिया गया था, उनमें से कुछ लोग पुन: यहां आकर रहने लगे। वहीं कुछ नए लोग भी आकर बसने लगे। ऐसा भी हुआ कि कब्जाधारी व्यक्ति अपने नाम जमीन या मकान लेकर चला गया, लेकिन उनके बच्चे अलग-अलग झोपड़ियां बनाकर रहने लगे। एक-एक के स्थान पर चार-चार मकान बनाकर रहने लगे। यह कब्जा बढ़ते गया।
छठी माई को अर्घ्य देकर लौटे और मिली जानकारी
करीब 6 साल से यहां रह रही गीता सोनकर ने बताया कि छठ पर्व के तहत गुरुवार को सुबह अर्घ्य देने बंधवा तालाब गए थे। जैसे ही व्रत तोड़ने के लिए पूड़ी का पहला निवाला ही लिया था कि पता चला कि निगम का दस्ता मकान तोड़ने के लिए आ धमका है। दौड़ते हुए आए, तो देखा कि कार्रवाई शुरू हो चुकी है। सभी को सामान निकलने के लिए कहा जा रहा है। सभी लोगों को देखकर हम भी अपना सामान निकाल रहे हैं। करीब 6 साल पहले जौनपुर से रायपुर आए थे। फिर जगह खाली कराया गया।
तीन दिन पहले भी नोटिस दिया, मुनादी भी कराई, इसके बाद कब्जा हटाया गया
3 दिन पहले कब्जेधारियों को पुन: नोटिस जारी किया गया। मुनादी भी कराई गई, लेकिन कब्जा नहीं हटाया गया। इसके बाद कार्रवाई की गई। करीब 131 परिवार चिन्हित किए गए हैं। कुछ नाम और आए हैं, सभी को सरकारी आवासों में शिफ्ट किया गया है। आवास आवंटन की प्रक्रिया जारी है। अधूरे मिनी स्टेडियम निर्माण का काम जल्द शुरू किया जाएगा।
-कीर्तिमान सिंह राठौर आयुक्त नगर निगम भिलाई-चरोदा