PHD स्टूडेंट्स ने किया कुलपति का घेराव:बोले-ऑफलाइन परीक्षा लेकर 123 विद्यार्थियों को कर दिया डिसक्वालीफाई; यूनिवर्सिटी पर लगाए कई गंभीर आरोप

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दुर्ग के हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में सोमवार को PHD कोर्स वर्क स्टूडेंट्स ने जमकर हंगामा किया और कुलपति का घेराव कर अपनी मांगें रखीं। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऑनलाइन पढ़ाई कराने के बाद ऑफलाइन परीक्षा ली और उसके बाद 123 स्टूडेंट्स को डिसक्वालीफाई कर दिया है। स्टूडेंट्स ने मांग की है कि कोर्स वर्क और प्रजेंटेशन दोनों के मार्क्स मिलाकर 55 प्रतिशत पासिंग मार्क्स का आधार रखा जाए और स्टूडेंट्स को पास किया जाए।

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में साल 2020 में 348 स्टूडेंट्स ने पी एचडी कोर्स में इनरोल्ड हुए थे। इनमें से 123 स्टूडेंट्स को कोर्स वर्क और प्रेजेंटेशन में 55-55 प्रतिशत अंक न लाने के चलते फेल कर दिया गया है। इस बात से नाराज सभी विद्यार्थियों ने सोमवार सुबह विश्वविद्यालय पहुंचकर कुलपति कार्यालय का घेराव किया। छात्रों ने इस दौरान जमकर हंगामा किया और युनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

छात्रों के हंगामे को देखते हुए कुलपति डॉ. अरुणा पल्टा ने पुलिस फोर्स को बुलवाया, लेकिन इसके बाद भी छात्र कई घंटे तक कुलपति कार्यालय के सामने डटे रहे। पी एच डी स्टूडेंट अनिल मिश्रा, दीपमाला, अंकिता शर्मा, नेहा विश्वकर्मा और मंजू वर्मा ने कहा कि जब उनकी पढ़ाई ऑनलाइन हुई है तो फिर एग्जाम भी ऑनलाइन ही होना चाहिए। यूजीसी की गाइडलाइन है कि 55 प्रतिशत अंक लाने वाले को पास किया जाए, लेकिन विश्वविद्यालय में कोर्स वर्क और प्रेजेंटेशन दोनों के एक साथ मार्क्स न देखकर अलग-अलग 55 प्रतिशत होना देखा जा रहा है। पिछली बार कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई करवाकर सभी को क्वालीफाइड कर दिया गया था, इस बार ऑफलाइन एग्जाम लेकर कठिन प्रक्रिया से गुजारा जा रहा है।

कुलपति को दिया आवेदन, लगाया यह आरोप

छात्र छात्राओं ने कुलपति के नाम एक आवेदन दिया है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि वह PHD कोर्स वर्क परीक्षा 2021 के परिणाम से संतुष्ट नही हैं। इसके लिए उन्होंने अलग-अलग बिंदुओं में कारण बताए हैं।

  • कोर्स वर्क का प्रश्न पत्र हमें नहीX दिया गया है।
  • कोर्स वर्क के परीक्षा में सभी प्रश्न वैकल्पिक थे, जिसके बाद भी लिए गए आंसर-की नहीं दी गई है।
  • जारी किए गए परीक्षा परिणाम में किसी भी शोधार्थी का प्राप्तांक नहीं बताया गया है।
  • कॉमर्स प्रश्न पत्र में प्रश्नों की गलतियां थी, उनका क्या आंसर लिया गया है और उसमें क्या नम्बर दिया गया है, इसकी भी जानकारी हमें नही दिया गया है।
  • परीक्षा प्रश्न पत्र व आदर्श उत्तर का अभाव और साथ ही जारी परीक्षा परिणाम में प्राप्तांक दर्ज नहीं करने के कारण हम अपने प्राप्तांक का आंकलन नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण परीक्षा परिणाम को लेकर संशय बना हुआ है।

यह रखी मांग

कुलपति को दिए गए आवेदन में उन्होंने मांग की है कि सभी उत्तीर्ण और अनुत्तीर्ण शोधार्थियों के प्राप्तांक को सार्वजनिक किया जाए। इतना ही नहीं सभी विद्यार्थियों को उनके प्रश्न पत्र एवं लिए गए उत्तर की प्रति प्रदान की जाए। ऐसा करने से विद्यार्थियों के मन में परीक्षा परिणाम को लेकर जो संशय बना हुआ है वह दूर किया जा सकेगा।

असफल परीक्षार्थियों को फिर से परीक्षा का मिलेगा मौका

विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. अरुणा पल्टा का कहना है कि सभी परीक्षाएं नियमतः और यूजीसी की गाइडलाइन के अनुरूप हुई हैं। विद्यार्थियों का आरोप गलत है। परीक्षा फल भी 67 प्रतिशत आया है, जो कि अच्छा रिजल्ट है। जो विद्यार्थी असफल हुए हैं उन्हें फिर से परीक्षा का मौका मिलेगा। वह तैयारी करें और अगली परीक्षा में पास होकर दिखाएं।