साल 2014 में केंद्र की सत्ता में जब भाजपा की सरकार बनी तो 2022 तक पक्का घर उपलब्ध कराने का वादा किया गया था। इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की गई। योजना का पोर्टल लांच होने के साथ बालोद शहर में भी आवेदन आने का सिलसिला शुरू हुआ। विभागीय प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद पात्रों की लिस्ट भी जारी की गई।
नए मकान जल्द बनने की आस ने कच्ची घर तुड़वा दिए लेकिन यह सपना फिलहाल अधूरा है, वजह है किस्त जारी न हो पाना। नपा के अनुसार 2 करोड़ रुपए अटकने से 250 मकान अधूरे है। 1500 मकान बनाने का लक्ष्य है लेकिन अब तक 700 ही बना है। यह न्यूनतम आंकड़ा नपा के अनुसार है। किसी हितग्राही की पहली तो किसी की दूसरी, तीसरी, चौथी किस्त अटकी है। केंद्र व राज्य शासन दोनों की ओर से राशि मिलाकर हितग्राहियों के खाते में ट्रांसफर की जाती है। विलंब के लिए दोनों जिम्मेदार हैं।
अधूरे बने मकान में खुले आसमान के नीचे रात काट रहे
योजना की जमीनी हकीकत जानने जब भास्कर टीम ने पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पक्का मकान मिलना तो दूर, कुछ लोगों के सिर से उनकी कच्ची छत भी छिन गई है। लोगों के लिए पक्का मकान आज भी अधूरा सपना है। पात्र लोगों का कच्चा मकान तो तुड़वा दिया गया, लेकिन पक्के मकान के लिए अब पैसों की किस्तें नहीं आ रहीं। किसी के मकान की नींव ही भर पाई है तो किसी के घर में अधूरी दीवारें खड़ी हैं। ऐसे में कोई किराए के मकान में रहने को मजबूर है तो कोई राशन दुकान या भवन में रह रहा है। कई लोगों को अधूरे बने मकान में ही खुले आसमान के नीचे रात काटनी पड़ रही है। बारिश में परेशान रहे अब ठंड का सामना करना पड़ेगा।
किस्त पर्याप्त नहीं आ रही
नपा के मुख्य इंजीनियर सलीम सिद्धिकी ने बताया कि शासन स्तर से ही किस्त पर्याप्त नहीं आ रही है इसलिए ऐसी स्थिति बनी है। पुराने जिनके पेंडिंग है, उनको प्राथमिकता दी जा रही है। सब इंजीनियर ताराचंद साहू ने कॉल अटेंड नहीं किया। राजवीर सिंग ने कहा इस संबंध में मेरे पास जानकारी नहीं है।
अतिरिक्त बोझ उठा रहे
मकान निर्माण अधूरा होने से अधिकांश लोग किराए के मकान पर निवासरत हैं। जिन्हें घर के साथ-साथ बिजली व पानी का भी अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है। आवास मित्र से लेकर नपा के इंजीनियर, अफसरों से पूछने पर जवाब दिया जाता है कि अभी शासन द्वारा फंड नहीं मिला है।