लापरवाही आई सामने जिले में 2422 फै​क्ट्रि​​यां हैं ​95% में फायर एनओसी नहीं...फर्नेस-1 कराया गया बंद...

त्वरित ख़बरें - निशा बिस्वास छत्तीसगढ़ ब्यूरों

रायपुर- रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड फैक्ट्री में शनिवार को हुए ब्लॉस्ट में मजदूर की मौत के बाद सोमवार को हेल्थ एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट के अधिकारी जांच के लिए पहुंचे। जांच के दौरान ढेरों खामियां पाई गई। हेल्थ एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट के अधिकारी आशुतोष पांडेय ने बताया कि जांच में फैक्ट्री संचालकों द्वारा मजदूरों को सुपरवाइजर के बिना 1600 ​डिग्री तापमान पर लोहा पिघलाने जैसे जोखिम भरे काम में लगाना मिला है।

फैक्ट्री में दो फर्नेस के संचालन के बाद भी ​​कर्मियों को संभावित खतरे से बचाव की ट्रेनिंग नहीं दी गई थी। मौके पर एसओपी (स्टैंडर ऑपरेटिंग प्रोसिजर) के अनुसार फर्नेस शुरू और बंद करने का टाइम दर्शाने के लिए लॉग बुक तक नहीं मिला।

इसके बाद फैक्ट्री के फर्नेस एक को तत्काल बंद करा दिया गया है। ब्लास्ट क्यों हुआ, इसकी जांच की जा रही है। पांडेय के मुताबिक मृतक गनियारी निवासी खेमलाल साहू फर्नेस के 35 फीट ऊपर क्रेन पर बैठा था। ब्लास्ट के बाद पिघले लोहे के कुछ छींटे उस पर पड़े। वह घबराकर ऊंचाई से नीचे कूद गया। चोट लगने की वजह से उसकी मौत हो गई। ब्लास्ट के बाद अचानक सतह पर फैले हॉट मेटल की चपेट में आने से दूसरा मजदूर तिवेंद्र साहू झुलसा।

एक अन्य अंजोरा निवासी सदानंद सिंह के पैर में गंभीर चोटें आई है। जांच में पता चला है कि फैक्ट्री में 1000 मजदूरों को लाइसेंस हासिल लिया है, लेकिन करीब 100 ​मजदूर से ही काम लिया जा रहा था। फैक्ट्री में कच्चा लोहा पिघलाकर लोहे की अन्य वस्तुएं बनाने के अलावा कई अन्य काम होते हैं। इधर तिवेंद्र का सेक्टर-9 हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि फायर एनओसी को लेकर आसपास की अन्य फै​​क्ट्रि​यों की भी जांच की जाएगी।जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र के मुताबिक जिले में छोटी-बड़ी कुल 2422 फैक्ट्रियां संचालित हैं। मजदूरों की संख्या के अनुसार इनकों कुल छह प्रकार सूक्ष्म, लघु, मध्यम, वृद्ध, मेगा और अल्ट्रा मेगा में बांटा गया है। ​औसत 50 कर्मियों के हिसाब से इन फर्मों में 1 लाख से ज्यादा मजदूर कार्यरत हैं। लेकिन जिला फॉयर अफसर नागेंद्र सिंह के अनुसार 95% के पास फॉयर एनओसी नहीं है। इसका मतलब यह कि इतनी बड़ी संख्या में फैक्ट्रियां बिना आग से ​सुरक्षा के उपाय के संचालित हो रही हैं। आग लगने की दशा में वहां काम करने वाले मजदूरों की जान जिले से फॉयर दल पहुंचने पर निर्भर है। जिले में इस समय 1764-सूक्ष्म, 608- लघु, 23- मध्यम, 21-वृहद, 5-मेगा, 1-अल्ट्रा मेगा फैक्ट्रियां संचालित हैं। इनमें से 95 प्रतिशत के पास फायर एनओसी नहीं है। खास बात यह है कि इन जगहों पर नियमित रूप से जांच भी नहीं हो रही। इसके चलते दिक्कत बनी हुई है।

हेल्थ एंड सेफ्टी विभाग की टीम ने जांच शुरू की

रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड फैक्ट्री की जांच की गई है। फैक्ट्री में मजदूरों को बिना सुपरवाइजर काम में लगाया जाना मिला है। लॉग- बुक नहीं मिला है। फर्नेस-1 को बंद करा दिया गया है।