बीएसपी के ओर हैंडलिंग प्लांट (ओएचपी) बी में सेफ्टी नार्म्स का पालन नहीं नहीं हो रहा। कर्मचारी सुरक्षा व्यवस्था की कमी और हादसे की आशंका के बीच कर्मचारी काम करने को मजबूर है। आधुनिकीकरण व विस्तारीकरण परियोजना (एमईपी) के तहत करीब 250 करोड़ की लागत से नया ओएचपी स्थापित किया गया है।
यह पूरी तरह नई तकनीक पर आधारित है। लिहाजा सेफ्टी और पर्यावरण की लिहाज से अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित माना जा रहा है। लेकिन विभागीय अफसरों की सेफ्टी नार्म्स को लेकर अनदेखी की वजह से नया ओएचपी दोनों ही मामले में खरा नहीं उतर रहे हैं।
जिसका असर सेफ्टी नार्म्स के साथ-साथ मौके पर काम करने वाले कर्मियों के स्वास्थ पर पड़ रहा है। बताया गया कि प्लांट के जिस हिस्से में बंकर से कन्वेयर बेल्ट में राॅ मटेरियल की सप्लाई की जाती है, उसे फेंसिंग कर घेरा जाना है। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ऐसे में यहां जरा सी असावधानी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
पुराने ओएचपी में हो चुकी घटना, 1 की मौत हुई थी
रोलर और कन्वेयर बेल्ट वाले हिस्से को कवर नहीं किए जाने की वजह से करीब 12 साल पूर्व घटना भी हो चुकी है। जिसमें जार्ज मैथ्यू बेल्ट और रोलर की चपेट में आ गया। उसकी मौत हो गई। रोलर की चपेट में आने की वजह तो अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई लेकिन माना गया कि उस एरिया को फेंसिंग कर घेरा जाता तो उस हादसे को टाला जा सकता था। नए प्लांट में भी लापरवाही दिख रही।
फैक्ट्री एक्ट के चैप्टर 4 के प्रावधानों का उल्लंघन
फैक्ट्री एक्ट के चैप्टर 4 में सेफ्टी को लेकर मापदंड स्पष्ट किए गए हैं। जिसके मुताबिक ऐसे सभी फैक्ट्री जहां घूमने वाले उपकरण का इस्तेमाल हो रहा हो, उसे फेंसिंग कर सुरक्षित किए जाने का प्रावधान है। लिहाजा ओएचपी में कन्वेयर बेल्ट को रोटेड करने वाले रोलर को गार्ड से कवर किया जाना चाहिए, जो ओएचपी बी में नहीं किया गया है। इस वजह से कर्मियों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
ओएचपी का मुख्य कार्य है राॅ मटेरियल की ट्रांसपोर्टिंग
प्लांट में बाहर से रा मटेरियल आने के बाद उसे ओएचपी के बंकर में खाली किया जाता है। बंकर से कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से विभिन्न मिलों में भेजा जाता है। मसलन ब्लास्ट फर्नेस 8 में आयरन ओर की सप्लाई की गई। फर्नेस में भी बंकर होता है। यहां रा मटेरियल को अनलोड किए जाने के बाद जरूरत के हिसाब से वहां से फर्नेस में आयरन ओर की सप्लाई की जाती है। इस प्लांट को 4 साल से आपरेट किया जा रहा है, उसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारी किसी तरह की गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं, इससे हादसे की संभावना बढ़ गई है। इस मामले में बीएसपी के अधिकारियों ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है।
फैक्ट्री लाइसेंस के लिए अब शुरू की प्रक्रिया
एक्सपांशन की दो इकाइयां एसएमएस-3 और आरएमपी-3 के साथ-साथ ओएचपी बी का फैक्ट्री लाइसेंस नहीं होने की जानकारी सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। विभागीय अफसरों ने अब अपनी लापरवाही को छुपाने के लिए लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए जरूरी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। फिलहाल इसकी प्रक्रिया ही चल रही है। कुछ दिनों पहले इस प्लांट के भी बिना लाइसेंस के ऑपरेट किए जाने की बात सामने आई थी, फिर प्रक्रिया शुरू की।
फाॅगिंग सिस्टम लगा पर अब तक चालू नहीं किया
इसी तरह ओएचपी बी में बंकर से कन्वेयर बेल्ट में लोडिंग के दौरान उठने वाले डस्ट को दबाने के लिए डस्ट फागिंग सिस्टम लगाया गया है। इसके लिए बाकायदा पंप हाउस भी स्थापित कर दिया गया है लेकिन सिस्टम को इंटीग्रेटेड नहीं किया गया है। इस वजह प्लांट में अभी भी मापदंड से अधिक डस्ट फैल रहा है। मापदंड के मुताबिक एक मीटर में 5 मिलीग्राम कंसंट्रेशन होना चाहिए। ओएचपी बी में इसकी मात्रा 50 मिलीग्राम तक पाई गई है। इससे कर्मचारियों की सेहत पर काफी बुरा असर पड़ रहा है।