जिले में हाईब्रिड बीज उत्पादन कार्यक्रम में किसानों को बड़ा झटका दिया है। नर-नारी हाईब्रिड धान उत्पादन लेने वाले 269 किसानों ने चार महीने तक इस किस्म की फसल ली, लेकिन खराब बीज होने की वजह से उत्पादन सिर्फ 10 प्रतिशत रहा। जिसकी वजह से किसानों को 3.43 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। हैदराबाद की मल्टीनेशनल कंपनी बायर ने किसानों को वर्ष 2021 रबी सीजन में किसानों को रिसर्च के तहत नर-नारी धान उपलब्ध करवाए थे।
किसानों ने जब नर और नारी धान का परागण यानी मिलान करवाया तो उसके बाद भी नारी फसल के बीज तैयार ही नहीं हुए थे। इस नारी धान बीज को कंपनी ने खरीदने का एग्रीमेंट किसानों से किया था। किसानों की शिकायत के बाद कृषि विभाग की जांच टीम ने फसल की पैदावारी नहीं होना पाया और किसानों के नुकसान का आंकलन किया है।
जिले में इस तरह किसानों ने ली नर-नारी धान फसल
जिले में दुर्ग, पाटन और धमधा ब्लॉक के किसानों ने नर-नारी धान फसल ली थी। 269 किसानों ने 982 एकड़ में नर-नारी धान फसल उगाए। उतई, खम्हरिया, पाटन के निपानी, ओदरागहन, धमधा के राहटादाह, जाताखर्रा, डोड़की सहित 52 गांव शामिल हैं। पाटन के 56 किसानों ने 116 एकड़ में इस किस्म की धान फसल ली। दुर्ग के 42 किसानों ने 156 एकड़ में और धमधा के 171 किसानों ने 710 एकड़ में लिया।
किसानों ने बताई आप बीती, नहीं सुन रहा कृषि विभाग, फसल बर्बाद हो गई, मुआवजा नहीं मिला
केस-1: राहटादाह के किसान भूषणसिंह ने 26 एकड़ खेत में नर-नारी धान का उत्पादन लिया। इस किसान ने चार महीने तक फसल तैयार कर ली। जब फसल में बीज के लिए नर और नारी पौधे का मिलान भी करवाते रहे लेकिन बीज ही नहीं निकले। भूषण बताते हैं कि कंपनी के मुताबिक एक एकड़ में प्रति क्विंटल औसतन 10 क्विंटल उत्पादन होना चाहिए था लेकिन यह मात्र डेढ़ क्विंटल ही हुआ। इस तरह प्रति एकड़ औसतन उत्पादन 8.50 क्विंटल कम हुआ।
केस-2: डोड़की के किसान जितेंद्र वर्मा ने 15 एकड़ खेत में नर-नारी धान का उत्पादन लिया। सवा चार महीने तक बुवाई, निंदाई से लेकर बाली निकलने तक मेहनत की। वे बताते हैं कि नर और नारी धान का परागीकरण यानी मिलान करने के लिए समय तय था। सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे के बीच ही धान का परागीकरण करवाते। उसके बाद भी एक एकड़ पीछे मात्र सवा क्विंटल उत्पादन हुआ। इस तरह प्रति एकड़ औसत उत्पादन 8.75 क्विंटल कम निकला।
6500 रुपए प्रति क्विंटल बीज खरीदने किया था एग्रीमेंट, हो गया नुकसान
प्रभावित किसानों ने बताया कि कंपनी ने अनुबंध के तहत 6500 रुपए प्रति क्विंटल बीज खरीदने तय किया था। खाद व बीज कंपनी ने ही किसानों को मुफ्त में उपलब्ध करवाया। पाटन में 40.60 लाख की क्षति किसानों को पहुंची। दुर्ग में 54 लाख 60 हजार रुपए की क्षति आंकलन हुआ। धमधा में 2 करोड़ 48 लाख 50 हजार रुपए की क्षतिपूर्ति तय की गई। जिसमें धमधा के पूरे किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है। दुर्ग और पाटन के किसानों की मुआवजा की पूरी राशि नहीं मिल पाया है।
किसानों के खर्चे और जांच में तय हुआ नुकसान
किसानों ने जब शासन-प्रशासन से शिकायत की तो कंपनी ने यह कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की कि जिले में नर-नारी धान पैदावारी अनुरूप क्लाइमेंट नहीं बना। जिसकी वजह से दोनों धान का मिलान करने पर भी परागीकरण नहीं हो पाया। किसानों ने एग्रीमेंट के आधार पर दावा भुगतान करने पर जोर दिया तब कहीं जाकर कृषि विभाग की टीम खेतों पर गई और जांच की। जांच में जिले के किसानों का 3.43 करोड़ रुपए का नुकसान तय किया गया।
जानिए नर-नारी धान की पैदावारी प्रक्रिया के बारे में
एक कतार में नर और एक कतार में नारी धान के बीज डाले जाते हैं। जब इन फसलों में पौधे लगने की बारी आती है तो नर से नारी फसल को मिलाया जाता है। इसके लिए दोनों फसलों को रस्सी से बांधकर रखा जाता है। परागीकरण के लिए उसे सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे के बीच रस्सी को हिलाते हैं। जिससे दोनों फसल आपस में मिलते हैं।
मुआवजा किसानों के खाते में भेजा, जांच भी की जा रही
- जांच के बाद कंपनी ने किसानों के खाते में मुआवजा रेफर कर दिया है। धमधा के पूरे किसानों को मुआवजा मिल चुका है। पाटन और दुर्ग के किसानों का प्रकरण बाद में तैयार हुआ है। उनकी राशि कंपनी में खाते में भेज दिया है। - एसएस राजपूत, उपसंचालक कृषि