दान पेटी लेकर महिलाएं बैठीं धरने पर ,
पंचायत विभाग में काम करने वाले शिक्षकों की विधवाएं सड़क पर आ गई हैं। कोरोना, दूसरी बीमारी और सड़क हादसों में जान गंवा चुके शिक्षकों के बाद अब इनके घरों में दो वक्त की रोटी का बंदोबस्त हो सके इसका कोई दूसरा रास्ता नहीं है। महिलाएं खुद दूसरे के घरों में या गांव के खेतों में मजदूरी करके घर में चूल्हा जला रहीं हैं, मगर अब ये अपने बच्चों के भविष्य को लेकर परेशान हैं।
पिछले दो सप्ताह से रायपुर के धरना स्थल पर ये महिलाएं धरना दे रही हैं। मगर कोई इनकी एक नहीं सुन रहा। ये सभी शिक्षकों की विधवाएं अब आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं। दान पेटी लेकर धरने पर बैठीं हैं ताकि राह चलते लोगों को ही इन पर दया आ जाए और कोई कुछ मदद कर दे, क्योंकि अपने हक के लिए धरने पर बैठने पर भी खर्च तो हो रही रहे हैं।
इन महिलाओं ने तीन महीने पहले भी धरना दिया था। तब सरकार की तरफ से मिले आश्वासन के बाद इन्होंने आंदोलन को वापस ले लिया था। दरअसल ये सभी महिलाएं मांग कर रही हैं कि इन्हें इनके पति की मौत के बाद अनुकम्पा नियुक्ति दी जाए। इनमें बहुत सी महिलाएं ऐसी भी हैं जिनके पतियों का देहांत साल 2017 में हो चुका है। तीन-चार सालों से महिलाएं रोजगार की मांग लिए भटक ही रही हैं।