फांसी का प्रावधान सक्ता बचाने का खेल:

त्वरित खबरें निशा विश्वास ब्यूरो प्रमुख रिर्पोटिंग

फांसी का प्रावधान सक्ता बचाने का खेल:

कोलकाता रेप एवं मर्डर केस को लेकर पश्चिम बंगाल में बवाल थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। पुलिस का काला कारनाम सामने आने के बाद सीबीआई मामले की तहकीकात कर रही है। लेकिन अभी डॉक्टर बेटी को इंसाफ नहीं मिला। न्याय की इस लड़ाई को तमाम लोग सड़कों तक खींच लाए हैं। सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा का विशेष सत्र शुरू हो रहा है ।जिसमें ममता सरकार फांसी की सजा के प्रावधान वाली एंटी रेप बिल पेश कर रही है। लेकिन सवाल फिर भी उठना है कि क्या फांसी की सजा का प्रावधान करने से दुष्कर्म की घटनाएं बंद होगी। 

आज ही पश्चिम बंगाल के गवर्नर गृह मंत्री अमित शाह से भी मिले हैं। इससे पहले भी वह राज्य के हालात से केंद्र को अवगत करा चुके हैं। उसे रिपोर्ट के बाद राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू ने अपनी चिंता कुछ इस शब्दों में जाहिर की थी बस अब बहुत हो चुका.....

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जिला न्यायपालिका के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि महाभारत के उच्च न्यायालय के वाक्य यतो धर्म ततो जय:का उल्लेख कई बार हुआ है जिसका भावार्थ है कि जहां धर्म है वहां विजय लेकिन रेप के मामले में इतने वक्त से फैसला आता है देरी के कारण लोगों को लगता है की संवेदना काम है,भगवान के आगे देर है अंधेर नहीं देर कितने दिन तक, 12 साल 20 साल ? न्याय मिलने तक जिंदगी खत्म हो जाएगी मुस्कुराहट खत्म हो जाएगी इस बाद में गहराई से सोचना चाहिए माननीय राष्ट्रपति की चिंता जायज है। लेकिन यह चिंता पहली बार नहीं सामने आ रही है। 

इससे पहले दिल्ली में निर्भया कांड हुआ था तब भी कई पत्रकार सामाजिक चिंतक समाजसेवी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति अपनी चिंता जाता चुके हैं। सरकार जागी कई कानून संशोधित कर उनके प्रावधान करें किए गए, देश की पुलिस भी थोड़ी सख्त हुई हजारों मुकदमे दर्ज किए गए कुछ राज्यों में जिला अदालत में ऐसे मामले पर त्वरित सुनवाई शुरू कर दी उत्तर प्रदेश की एक अदालत में तो सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए महज 77 दिन में अपना फैसला सुनते हुए दुष्कर्म के आरोपी को सजा सुनाई इसके बावजूद क्या लड़कियों के प्रति पुरुष की सोच में कोई सकारात्मक परिवर्तन आया।

 हमारा मानना तो यह है कि 21वीं सदी में भी लोगों की सक्रीण मानसिकता का ही नतीजा है। कि देश सामाजिक बुराइयों जैसे दहेज प्रथा ,कन्या भ्रूण हत्या, बेमेल विवाह घरेलू हिंसा वह अन्य बढ़ते अपराध से मकड़जाल से मुक्त नहीं हो पाया है। सामूहिक दुष्कर्म की घटना लगातार बढ़ रही है आखिर लोगों के अंदर कानून का खौफ क्यों नहीं है।

दरअसल कानून का पालन करने की जिसकी जिम्मेदारी है उन्हें में से कुछ पुलिसकर्मी और अधिकारी भ्रष्ट है, उनकी वजह से जहां विभाग बदनाम होता है और सरकार पर भी उंगली उठती है वहीं लोगों का कानून और अदालत से भरोसा उठ जाता है देश में जितने भी कानून है उसमें बहुत ताकत है अगर उसे कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए तो कोई भी अपराधी बच नहीं सकता लेकिन यह पूरी ईमानदारी शायद ही किसी मामले में देखने को मिली नतीजा तन कई बार अपराधी होते हुए भी आरोपी अदालत से बरी हो जाता है। पुलिस की लापरवाही उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार और अदालतों की देरी से आहत हो कई मौत को गले लगा चुकी है ,कुछ रोजाना मरती है, तो कितनी ऐसी भी है जिनका इस व्यवस्था से दम घुट रहा है वह कहती है कानून में 72 छेद है कहीं से भी यह अपराधी बच निकलता है। ऊपर से छोटे बड़े नेता और संवेदनहीन मंत्री अपनी राजनीति चमकाने के लिए लाश पर सिहासत करने से नहीं चूकते उन्हें सत्ता पर काबिज सरकार को गिराने और बढ़ाने का जुगाड़ मिल जाता है यह सत्ता बचाने का तो ही खेल है कि ममता सरकार फांसी की सजा के प्रावधान वाली एंट्री रेप बिल पेश कर रही है। ममता दीदी को पता है कि पश्चिम बंगाल राष्ट्रपति शासन की ओर से बढ़ रहा है। अगर उन्होंने यह बिल पेश नहीं किया तो देश को क्या जवाब देगी मानव अधिकारी में और थू थू होगी।शायद अगली बार टीएससी तक के हाथ से सत्ता भी चली जाएगी वरना इसकी क्या गारंटी है कि इस फांसी के प्रावधान से हैवानियत काम हो जाएगी?

 सामूहिक दुष्कर्म की घटनाएं नहीं होगी रेप और मर्डर होने बंद हो जाएंगे यौन शोषण के मामले रुक जाएंगे या नारी पर अत्याचार होना बंद हो जाएगा दरअसल जब तक सामाजिक ताना-बाना नहीं बन जाएगा समाज का विकास नहीं होगा हर हाथ को कम नहीं मिलेगा धर्म मजहब और सकारात्मक विचारों के माध्यम से लोगों को जागरूक नहीं किया जाएगा जब तक सोशल मीडिया पर गांधी अश्लील तस्वीरें और वीडियो जारी होते रहेंगे सिनेमा की दुनिया में अश्लीलता पड़ोसी जाएगी तब तक लोगों की संकलन विचारधारा को नहीं बदला जा सकता 100 की सीधी एक बात जो दिखता है अधिकतर लोग उसी का अनुशरण करते हैं अगर पुरुष भ्रष्टाचार से मुक्त होकर काम करें न्यायालय फास्ट कोर्ट में तब्दील हो जाए और समाज को जागरूक करने के लिए हमारे देश के कर्णधार संता का मोह छोड़कर पूरी ईमानदार कोशिश करें तो निश्चय ही अपराध पर अंकुश लग सकता है