पेट की बीमारियों का समय पर होगा इलाज,अब बड़ी आंत में कैंसर का तुरंत पता लगाएगा AI...

त्वरित ख़बरें -सत्यभामा दुर्गा रिपोर्टिंग

यह नई रिसर्च और इससे जुड़ी जानकारी गुरुवार को स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय में हुई इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान सामने आई।मानव शरीर के लार्ज इंटेस्टाइन में होने वाले कैंसर की पहचान करने अक्सर डॉक्टर्स कोलोनोस्कोपी टेस्ट की सलाह देते हैं। यह टेस्ट आंतों में पहुंचकर इमेज प्रोसेसिंग के जरिए भीतर की बीमारी का पता लगाता है। यह टेस्ट फिलहाल मैनुअली ही हो सकता है, लेकिन जल्द ही इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एंट्री होने वाली है। एआई को कोलोनोस्कोपी टेस्ट डिवाइस के साथ इंटीग्रेट करके नया प्रोसिजर तैयार किया जाएगा।इससे एआई आंतों के बीच पहुंचकर जो देखेगा उसे खुद की समझ के साथ नतीजों की शक्ल में सामने रखेगा। इससे जनरेट की गई रिपोर्ट में दोमत नहीं होंगे। इस रिपोर्ट पर पूरी तरह से भरोसा किया जा सकेगा। यह नई रिसर्च और इससे जुड़ी जानकारी गुरुवार को स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय में हुई इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान सामने आई। दो दिन चली इस कॉन्फ्रेंस में 250 से अधिक शोधपत्र पढ़े गए।इस कॉन्फ्रेंस के मुख्य अतिथि के रूप में आईआईटी भिलाई के निदेशक डॉ. राजीव प्रकाश शामिल हुए। वहीं ऑस्ट्रेलिया की स्विनबर्न यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. साद मेखिलेफ और इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के प्रयात वैज्ञानिक डॉ. बी. सत्यनारायण बतौर विशिष्ठ अतिथि कॉन्फ्रेंस का हिस्सा बने। इस कॉन्फ्रेंस में प्रमुख वक्ता डॉ. बी. सत्यनारायण ने मौलिक विज्ञान अनुसंधान के लिए उन्नत उपकरण प्रणाली पर अपना महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया।इसके बाद एमएसएमई विकास सुविधा कार्यालय रायपुर के सहायक निदेशक किशोर इरपाते ने एमएसएमई योजनाओं पर व्यायान दिया। उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए विभिन्न सरकारी पहलुओं का संपूर्ण अवलोकन प्रस्तुत किया। कुलपति प्रो. एमके वर्मा ने आईईईई समेलन के समापन समारोह में अपने विचार साझा किए। इस मौके पर प्रो वाइस चांसलर प्रो. संजय अग्रवाल, सीएसवीटीयू यूटीडी निदेशक डॉ. पीके घोष, सीएसवीटीयू फोर्टे के निदेशक डॉ. आरएन पटेल भी मौजूद रहे।समेलन में एक शोधार्थी ने अपने शोधपत्र में बताया कि एआई के माध्यम से बीपी और न्यूमोनिया का निदान करने का तरीका भी प्रस्तुत किया गया। एआई के एडवांस्ड एल्गोरिदस और तकनीकों से रोगों के अरली इंडिकेटर्स को पहले से ही पता चल सकता है। एआई मॉडल्स मेडिकल रिकॉर्ड्स, जेनेटिक इनफार्मेशन और लाइफ स्टाइल फैक्टर्स जैसे बड़े डेटा ऑफ अमाउंट्स को एनालाइज करके प्न्यूमोनिया और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के सबटल पैटर्नस और अरली इंडिकेटर्स को डिटेक्ट कर सकते हैं।इससे डॉक्टर्स को पेशेंट्स के लक्षण और रिस्क फैक्टर्स के बीच में छिपे हुए पहलुओं को समझने में आसानी होगी जो मैनुअल जांच में मुश्किल हो सकता है। एआई के उपयोग से समय पर बीमारी का पता लगाना संभव हो जाता है, जिससे समय पर उपचार शुरू किया जा सकता है और पेशेंट्स की सेहत में सुधार लाया जा सकता है।