कुवैत में एक बहुमंजिला इमारत में आग लगने से 45भारतीय कामगारों की मौत हो गई, वहीं कई लोग घायल हुए हैं.खाड़ी देशों में दुर्घटनाओं के बाद श्रमिकों की स्थिति अक्सर ख़बरों में रहती है, लेकिन ख़राब जीवन स्थितियों के बावजूद भारतीय कामगार काम के लिए खाड़ी देशों में क्यों जाते हैं?भारत और खाड़ी देशों के बीच पिछले कई दशकों से पुराना रिश्ता है.जीसीसी का मतलब खाड़ी सहयोग परिषद है. इसमें छह देश शामिल हैं- सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात , ओमान, बहरीन, क़तर और कुवैत. इस समूह की स्थापना 1981 हुई थी.भारतीय विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक़, 2022 में इन जीसीसी देशों में क़रीब 90 लाख भारतीय रह रहे थे.इनमें सबसे ज़्यादा यानी 35 लाख से ज़्यादा भारतीय संयुक्त अरब अमीरात में रहते हैं.वहीं सऊदी अरब में करीब 25 लाख भारतीय रहते हैं, जबकि कुवैत में नौ लाख से ज़्यादा, कतर में आठ लाख से ज़्यादा, ओमान में साढ़े छह लाख से ज़्यादा जबकि बहरीन में तीन लाख से ज़्यादा भारतीय रहते हैं.भारत ही नहीं बल्कि दक्षिण एशियाई देशों के ढेरों लोग जीसीसी समूह के देशों में रहते हैं.संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक इन छह जीसीसी देशों में करीब एक करोड़ 70 लाख से ज़्यादा दक्षिण एशियाई नागरिक रह रहे हैं.भारत के अलावा यहां पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के नागरिक भी काम की तलाश में जाते हैं.कुवैत में हुए अग्निकांड में बड़ी संख्या में केरल के मजदूरों की जान चली गई, क्योंकि जीसीसी देशों में प्रवास करने वाले भारतीयों में केरल और गोवा के लोग सबसे ज़्यादा हैं.