राजनांदगांव। भागवताचार्य पंडित अंकित भाई शर्मा ने आज यहां कहा कि सत्संग से मनुष्य के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आता है। उन्होंने कहा कि आज वर्तमान समय में बच्चे सत्संग नहीं करते है । उससे उन्हें बड़े बुजुर्गो के साथ किस प्रकार व्यवहार करना चाहिए, उनका किस प्रकार आदर करना चाहिए , इसका भान नहीं हो पाता।
भागवत आचार्य पंडित अंकित भाई शर्मा आज यहां बलदेव बाग के साहू अपार्टमेंट में प्रकाश नत्थानी एवं प्रमोद नत्थानी परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में व्यासपीठ से बोल रहे थे। राष्ट्रीय संत रमेश भाई ओझा एवं वसंत शास्त्री मथुरा के शिष्य अर्पित भाई शर्मा ने कहा कि सत्संग का ज्ञान हमें अच्छे मित्रों की संगति अच्छी किताबों के पठान और उसमें लिखे गए शब्दों को मन में उतरने से आता है। इसके अलावा किससे कैसा व्यवहार करना है यह हमें कथा के माध्यम से भी जानने को मिलता है ,जैसे श्रीराम जी के चरित्र से गुरु के साथ रहने के दौरान हमें कैसा व्यवहार करना चाहिए, मर्यादा में रहना चाहिए, माता-पिता की आज्ञा का पालन करना चाहिए, गंभीर एवं शांत व्यक्तित्व का स्वामी होना चाहिए तथा कैसे उत्तम पुरुष बन सके इसका ज्ञान मिलता है। ऐसी कथा का जब बालक श्रवण करेंगे तो देश को आदर्श नागरिक मिलेंगे ।
भागवताचार्य पं शर्मा ने कहा कि यदि कोई कार्य आप से न हो रहा हो तो उसे श्रीकृष्ण से निवेदित करे और कहे कि हम आपके आश्रित हैं । फिर आप अर्जुन की तरह अपने जीवन रथ को श्रीकृष्ण के हाथो सौपकर बेफिक्र हो कर सभी पुरुषार्थ करें आप अवश्य सफल होंगे , श्रीकृष्ण आपको सफल बनाएंगे । पं शर्मा ने भागवत कथा के द्वितीय दिवस भगवान के 22 अवतारों और महाभारत की भी कथा हुई । कुंती के द्वारा भगवान की स्तुति और परीक्षित राजा को शमिक ऋषि के पुत्र से श्राप की प्राप्ति आदि कथा सुनाई ।