पैसों के लालच में सुपेला सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ने बनाया मृतक व्यक्ति का फिट अनफिट

त्वरित ख़बरें/ भिलाई संवाददाता

भिलाई/ त्वरित ख़बरें/  डॉक्टरों को वैसे तो धरती का भगवान माना जाता है लेकिन कई बार वह ऐसे काम को अंजाम देते हैं जो इनके पवित्र पेशे को कलंकित कर देता है। ऐसे ही एक मामला भिलाई के सरकारी अस्पताल में सामने आया है l जहां पर डॉक्टर ने पैसे के लालच में मृत व्यक्ति का फिट एवं अनफिट बना दिया, डॉक्टर के साथ- साथ डॉक्टर की साथी कर्मचारी भी शामिल हैं जो डॉक्टर की कमाई करवाने में सहायता करती है पेशेंट ढूंढना और डॉक्टर के पास चले जाकर उसका पेपर बनाना डॉक्टर के साथ सांठगांठ कर रुपए ऐंठने का काम किया जाता है पैसों के लालच में डॉक्टर एवं कर्मचारी ऐसे लिप्त हुए की जो पेशेंट जीवित है नहीं है l  पेशेंट है भी कि नहीं इसका कोई ध्यान नहीं दिया गया यह देखा भी नहीं गया कि पेशेंट है तो कहां है l यह काम आए दिन सुपेला के सरकारी अस्पताल में होता है चंद पैसों के लालच में डॉक्टर अपने ऊपरी कमाई करने के लिए किसी का भी पेपर तैयार कर देते हैं l किसी का भी फिट अनफिट तैयार कर देते है l दुकानों में जैसे समान लेने के लिए होड़ लगी रहती है,  दो- दो रुपए के सामान के लिए लोग भीड़ लगाकर रखते हैं l उसी तरह सरकारी अस्पताल में मात्र दो दो हजार के लिए डॉक्टर पेपर तैयार करने में जुट जाते हैं ऐसे डॉक्टरों को क्या सरकार पेमेंट देना बंद कर दी है कि जिसमें यह ₹2000 लेकर अपना ईमान बेचने बैठे हैं l इंसानियत खो बैठे हैं l यह सब कार्य काफी दिनों से चलते आ रहा हैं l

एक स्ट्रिंग ऑपरेशन के जरिए त्वरित खबरें अखबार के प्रधान संपादक प्रहलाद दुबे  ने जाना कि किस तरह से सुपेला के सरकारी अस्पताल में डॉक्टर अपना अड्डा बना बैठे हैं जब डॉक्टर पीयम सिंह प्रभारी चिकित्सा अधिकारी से पूछताछ किया गया कि जिस व्यक्ति का फिट अनफिट वह भी सिर्फ 2 दिनों में बना कर दिया है l क्या वह व्यक्ति या पेशेंट का चेकअप आपके द्वारा किया गया ? क्या आपने पेशेंट को देखा ? क्या आपने पेशेंट का इलाज किया ? जिसके माध्यम से आप ने उसका फिट अनफिट बनाया l डॉक्टर जवाब देते हुए भी कहता है -  कि नहीं मैंने पेशेंट को नहीं देखा, ना मैंने इलाज किया मैंने तो बस फिट एवं अनफिट बना कर दिया l डॉक्टर कबूल भी कर रहा है कि उससे गलती हुई जिसके बाद भी डॉक्टर को किसी भी तरह का पछतावा नहीं है इतनी बड़ी गलती के बाद भी डॉक्टर को किसी भी तरह का मलाल नहीं है मानो किसी ऐसे अधिकारी का छाया उसके ऊपर हो जिससे वह  निश्चिंत हैl ऐसे डॉक्टरों के कारण से ही न्यायालय में कुछ ऐसे केस कुछ ऐसी घटनाएं सही साबित हो जाती हैं और कहीं गलत भी साबित हो जाती हैं इन जैसे डॉक्टरों के कारण से ही कई ऐसे लोग हैं जिनकी जिंदगी बर्बाद भी होती है पर डॉक्टर एक तरफ सरकार से अपना पेमेंट ले रही है दूसरी तरफ यही डॉक्टर आम जनता को कुछ पैसों के लालच में लूट भी रही है जिसके कारण जो सच की लड़ाई लड़ने वाले लोग ऐसे डॉक्टरों के कारण से सच होते हुए भी हार जाते हैं डॉक्टर तो भगवान स्वरूप होता है पर जब डॉक्टर ही गलती करने पर उतर आए तो इंसान भरोसा किस पर करें l आए दिन खबरों में मामला सुनने को मिलता है महिलाओं के साथ जो दुर्घटनाएं घटती हैं और जो कुछ दरिंदे होते हैं जो घटनाओं को अंजाम दिए रहते हैं ऐसे डॉक्टरों के मुलायजा के कारण से ही पेपर वर्क के कारण से ही वह दरिंदे खुलेआम घूमते हैं और जिन महिलाओं के साथ घटनाएं घटी रहती हैं वह या तो अपना दम तोड़ देती है या डॉक्टर से आस छोड़ देती हैl

कमीशनखोर चिकित्सकों की डिग्री रद्द की जाए

भगवान के बाद किसी को पूजा जाता है, तो वह है चिकित्सक। कोरोना के दौरान इनका भगवान का स्वरूप नजर भी आया, लेकिन जब कुछ चिकित्सक चंद पैसे अधिक कमाने के लालच में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने लग जाएं, तो जनता किससे गुहार लगाए।

कड़े कदम की जरूरत

ऐसे डॉक्टरों पर कार्यवाही के लिए कड़े कदम की जरूरत है त्वरित खबरें अखबार के प्रधान संपादक ने डॉक्टर पीयम सिंह प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की शिकायत जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, सहित मुख्य चिकित्सा अधिकारी को किया है अब देखते हैं आगे अधिकारीगण इस पर क्या कठोर कदम और सही निर्णय लेती हैl 

डॉक्टर को आईना दिखाया तो लगा बुरा 

भिलाई सुपेला के सरकारी अस्पताल में कार्यरत डॉ पीयम सिंह प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को जब उनके द्वारा किए गए गलती को त्वरित खबरें अखबार के प्रधान संपादक प्रहलाद दुबे ने बताया विषय पर चर्चा किया जिस पर डॉक्टर  ने स्वयं कबूल किया कि उसने गलती बहुत बड़ी की है पर इसका उसे मलाल नहीं है जिस पर पलटवार करते हुए डॉक्टर ने प्रधान संपादक को पत्रकारिता का गलत उपयोग बताने लगेl 


पत्रकारिता क्या है,  पत्रकारिता जो समाज में हो रही घटनाओं अत्याचारों समसामयिक घटनाओं को जनता के सामने लाए हो रहे गलत अत्याचार को सही करें l देश का चौथा स्तंभ कहे जाने वाला पत्रकारिता को यह कमीशन खोर डॉक्टर जब उन्हें उनकी गलती पर आईना दिखाया जाता है ,तब ऐसे  घूसखोर डॉक्टर, घूसखोर अधिकारी, कर्मचारी या बिजनेसमैन जो भी हो सत्य की आईना दिखाने को ब्लैकमेल का नाम देते हैं l ब्लैकमेल का नाम देने वाले यह लोग पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखें, उसके बाद बताएं ब्लैकमेल क्या होता है जनता के साथ खेलना गलत सामान गलत दवाएं l बिना पेशेंट देखें इलाज करना पेपर वर्क करना यह सब उनके नजर में सही है ,और जब यही बात पत्रकार सवाल के रूप में करें तब वह एक ब्लैकमेलर बन जाता है l जब खुद दो पैसे के लालच में बिक जा रहे हैं तब वह खुद ब्लैकमेलर नहीं होते हैं और पत्रकार जब उनको आईना दिखाएं तब पत्रकार ब्लैकमेल बन जाता है, आज की जनता को आम नागरिकों को अधिकारियों को जानने की जरूरत है हर वह चीज जो समाज में गलत हो रही है l उस पर बात करना आम जनता का साथ देना ब्लैकमेल नहीं होता और जो यह वर्ड जो यह शब्द उपयोग में लाते हैं वह सबसे बड़ा ब्लैकमेलर होता है l समाज में सबको अपनी अच्छी छवि चाहिए एक समाज सेवक हो चाहे वह किसी भी पद पर कार्यरत अधिकारी कर्मचारी हो बड़ा राजनेता हो पत्रकार को उपयोग अपने बारे में अच्छा अच्छा कहे बोले वह अपने समाचार में, प्रकाशित करें तब पत्रकार अच्छे हैं और जब यही पत्रकार उनके द्वारा की जा रही गलतियों को पकड़े तब वही पत्रकार ब्लैकमेलर हो जाता है आज सबको जागृत होने की जरूरत है ऐसे घूसखोर डॉक्टरों पर लगाम कसने की जरूरत है जो कुछ पैसों के लालच में आकर फिट अनफिट बनाने का काम धड़ल्ले से कर रहे हैं बेखौफ होकर कर रहे हैं l

आगे समाचार में आपको पाठकों को प्रधान संपादक द्वारा किया गया डॉक्टर का स्टिंग ऑपरेशन वीडियो फुटेज और समाचार बताया जाएगा कि किस तरह डॉक्टर बिना पेशेंट देखें बिना जांच किए अपना काम किए है l स्वयं अपनी गलतियों को मानना डॉक्टर की ही जुबानी सुनिए आप बने रहिए त्वरित खबरें अखबार के साथ.......

डॉ. द्वारा बनाया गया फिट अनफिट पेपर