11 जुलाई 2022
‘बेफ्रिके’, ‘अजीब दास्तां’ फेम अरमान रलहन का वेब शो ‘शूरवीर’ आ रहा है। अरमान मशहूर निर्माता, राइटर, डायरेक्टर और एक्टर ओपी रलहन के पोते हैं।
अभिनय का शौक और सपना कब से देखना शुरू किया?
बचपन में फिल्म और स्पोर्ट्स में दिलचस्पी ज्यादा और पढ़ाई में कम रही। मुझे फिल्म देखने का बड़ा शौक था, लेकिन मंडे टू फ्राइडे अलाऊ नहीं था, इसलिए सटरडे और संडे का इंतजार करता था। बचपन में मुझे चश्मा भी इसलिए लग गया, क्योंकि बहुत सारी फिल्में देखता था। स्कूली शिक्षा खत्म होते-होते तय कर लिया था कि फिल्म लाइन में ही आना था। लेकिन पापा का इंडस्ट्री में कोई कनेक्शन नहीं था। पिताजी ने कहा कि बैकअप के लिए काम कर लीजिए, उसके बाद पैशन फॉलो कीजिए।
आपने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री से आपके परिवार का कोई लिंक नहीं था, जबकि आपके नाना ओ.पी. रलहन तो काफी फिल्में बना चुके हैं?
ओपी रलहन मेरे नाना जी थे। उन गुजर जाने के बाद पिताजी ने कुछ किया नहीं, इसलिए बीच में एक पीढ़ी का गैप आ गया। मैं छोटा ही था, तब नाना ने फिल्म बनाना बंद कर दिया था, क्योंकि वे बीमार रहते थे।
इंडस्ट्री में कनेक्शन कैसे बनाए?
मैं शानू शर्मा से मिलने गया था। उनके साथ मीटिंग हुई तो उन्होंने कहा- अभी आपके लिए ऐसा कोई प्रोजेक्ट नहीं है, पर हम संपर्क में रहेंगे और साथ काम करेंगे। एक दिन उनका फोन आया और ऑडिशन के लिए बुलाया। ऑडिशन देने तक मुझे पता नहीं था कि कौन-सी मूवी कर रहा हूं।
ऑडिशन का सिलसिला आगे बढ़ा, तब एक दिन आदित्य चोपड़ा से मिलने गया। वहां जाकर ‘बेफ्रिके’ के लिए साइन हुआ। निर्देशक शशांक खेतान ‘बेफ्रिके’ फिल्म देखी थी, तब उन्होंने कई लोगों के साथ मेरा भी ‘अजीब दास्तां’ के लिए ऑडिशन लिया। इस तरह एक प्रोजेक्ट से दूसरा प्रोजेक्ट मिलता गया और आज वेब सीरीज ‘शूरवीर’ के लिए बात कर रहे हैं।
अच्छा, ‘शूरवीर’ में किरदार की खूबी क्या रही, जो इसे करने के लिए तैयार हुए?
बचपन में बच्चों का सपना आर्मी, एयरफोर्स, नेवी में जाने का होता है। मेरा भी एयरपोर्ट में पायलट बनने और यूनिफॉर्म पहनना था। किरदार के अंदर और स्टोरी की बात करें, तब इस कैरेक्टर के काफी एलिमेंट्स थे, जो करने के लिए एक्साइटेड किया।
एक्शन फिल्म में पायलट बनने के लिए खास तैयारी क्या किए?
दो तरह से तैयारी की। पहली फिजिकल तैयारी रही, जिसके लिए डायट, वर्कआउट और बॉडी पर काम किया। मसल्स और चार-पांच किलो वजन बढ़ाना पड़ा। कार्डियो भी करना पड़ा। मैंने रिसर्च किया कि पायलट कैसे ट्रेनिंग करते हैं, उसी तरीके से ट्रेनिंग की।
साइकिलिंग और स्किपिंग पर भी काफी ध्यान दिया। निर्देशक कनिष्क वर्मा ने काफी डाक्यूमेंट पढ़ने और वीडियोज देखने के लिए भेजा था कि स्पेशल टास्क फोर्स पायलट कैसे बात करते हैं। उसे बड़ी बारीकी से पढ़-देखकर एक नया कैरेक्टर गढ़ने की तैयारी की।
सेट पर की कोई यादगार बात क्या रही?
मेरे लिए सबसे यादगार बात जेट के लिए शूटिंग करना था। एयरफोर्स जेट के अंदर सच में बैठना और शूटिंग करना लॉन्ग लाइफ तक याद रहेगा, क्योंकि कभी सोचा नहीं था कि लाइफ में एयरफोर्स जेट में बैठूंगा। शायद इंडियन सिनेमा में पहली बार एयरफोर्स जेट देखने को मिलेगा। इसे लेकर काफी एक्साइटेड हूं।
OTT पर शो आने की एक्साइटमेंट क्या है?
थिएटर का रिजल्ट दो-तीन दिन में आने लगता है, जबकि ओटीटी पर समय लगता है। लेकिन नर्वसनेस और एक्साइटमेंट कॉमन है, यह दोनों चीजें हमेशा रहती ही हैं। आशा करता हूं कि लोगों को शो और मेरा काम पसंद आए।
इस एक्शन शो को कितना रियल लोकेशन और कितना सेट लगाकर शूट किया गया?
काफी हद तक रियल लोकेशन पर शूट किया गया। शो देखने पर लगेगा कि कनिष्क ने स्केल वाला शो बनाया है। उसके लिए लोकेशन पर जाना जरूरी था। इसे शूट करने के लिए कश्मीर, दिल्ली, मुंबई आदि जगहों पर शूट किया। मैंने अपने करियर में सेट पर कम और रियल लोकेशन में ज्यादा काम किया है। मेरे लिए सेट पर काम करना नया होगा। लेकिन एक्शन में लोकेशन बड़ा हो जाता है, सो इसे फिल्माने में मजा आया।
नानाजी के किन फिल्मों के फैन हैं?
‘हलचल’ है, उन्होंने इसका डायरेक्शन, एक्टिंग और लिखा भी है। इसके अलावा उनकी ‘तलाश’, ‘बंधे हाथ’, ‘फूल और पत्थर’ आदि मेरी फेवरेट फिल्में हैं।