दुर्ग / धमधा / रोका-छेका के माध्यम से किसान और पशुपालक अपने पशुओं को खुले में चराई के लिए नहीं छोड़ने का संकल्प लेते हैं, ताकि फसलों को नुकसान न पहुंचे. पशुओं को घरों, बाड़ों और गौठानों में रखा जाता है और उनके चारे-पानी का प्रबंध भी किया जाता है | रोका- छेका के अंतर्गत विकासखंड धमधा के ग्राम मलपुरीकला में सरपंच रामनारायण साहू द्वारा ग्रामीण बैठक कराकर रोका - छेका हेतु चारवाहों की व्यवस्था की गई | बैठक में सरपंच द्वारा बताया गया कि गांवों में गौठानों के बनने से रोका-छेका का काम अब और भी ज्यादा आसान हो गया है. गौठानों में पशुओं की देखभाल और उनके चारे-पानी की प्रबंध की चिन्ता अब किसानों और पशुपालकों को नहीं है क्योंकि गौठानों में इसका प्रबंध पहले ही किया गया है | इसके साथ ही साथ पहटिया (चरवाहे) की व्यवस्था से पशुओं का गौठानों में व्यवस्थापन सुनिश्चित करायें. गौठानों में पशु चिकित्सा तथा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कराया जाए तथा वर्षा के मौसम में गौठानों में पशुओं के सुरक्षा हेतु व्यापक प्रबंध किया जाए. वर्षा से जल भराव की समस्या दूर करने के लिये गौठानों में जल निकास की समुचित व्यवस्था की जाए तथा गौठान परिसर में पशुओं के बैठने हेतु कीचड़ आदि से मुक्त स्थान की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए |