पहली से आठवीं तक की एंडलाइन परीक्षा की तैयारी शुरू हो गई है। एंडलाइन परीक्षा में पाठ्यपुस्तक के आखिरी 40 प्रतिशत कोर्स से ही सवाल पूछे जाएंगे। कोरोना की वजह से दो साल से प्राइमरी और मिडिल क्लास के बच्चों ने परीक्षा नहीं दी है। इस बार परीक्षा मार्च में आयोजित होगी।
पूरे प्रदेशभर में पहली से आठवीं क्लास तक के बच्चों का प्रश्नपत्र एनसीईआरटी तैयार करके देगा। दुर्ग जिले के 1.10 लाख बच्चे इस परीक्षा में शामिल होंगे। कोरोना काल की वजह से प्राइमरी और मिडिल स्कूल के बच्चों की पढ़ाई बेहद प्रभावित रही है। इसलिए एनसीईआरटी ने इस बार परीक्षा का सिस्टम बदला है। इन कक्षाओं के बच्चों की बेस लाइन और मिडलाइन परीक्षा ली जा चुकी है।
इन दोनों परीक्षाओं में पाठ्यक्रम के 30-30 प्रतिशत यानी कुल 60 प्रतिशत कोर्स से सवाल पूछे गए थे। इसलिए एंडलाइन में बचे हुए 40 प्रतिशत कोर्स से ही सवाल बच्चों को दिए जाएंगे। बच्चों को परीक्षा में किसी तरह की परेशानी न हो, इसका भी ध्यान रखा जा रहा है। क्योंकि पहले के 60 फीसदी कोर्स की पढ़ाई ऑनलाइन ही कराई गई थी, इसलिए ज्यादातर बच्चे अच्छे ढंग से पढ़ नहीं पाए हैं। उनका भविष्य खराब न हो, इसलिए इस बार परीक्षा का पैटर्न बदला गया है।
आंकलन: कक्षा तीसरी स्तर के प्रश्नों को करना है हल
एंडलाइन परीक्षा में बच्चों का स्तर आंकलन भी होगा। यानी यदि कोई बच्चा सातवीं कक्षा में है तो तीन खंड में सवाल दिए जाएंगे। पहले खंड में कक्षा सातवीं के सवाल देंगे। दूसरे खंड में उसे दो साल पीछे यानी कक्षा पांचवीं के स्तर के सवाल हल करने हैं। तीसरे खंड में उससे दो साल पीछे यानी कक्षा तीसरी स्तर के प्रश्न पूछे जाएंगे।
प्रश्नपत्र में ही उसका उत्तर लिखकर देने की व्यवस्था ताकि बच्चे पूरा लिख पाएं
एंडलाइन परीक्षा में एनसीईआरटी ऐसा प्रश्नपत्र तैयार किया है जिसमें बच्चों को सवाल के नीचे में ही उत्तर लिखने के लिए खाली जगह मिलेगी। बेस लाइन परीक्षा में अलग पन्ने में बच्चों ने सवाल हल किए थे। इसी तरह मिडलाइन परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र के नीचे उत्तर लिखने के लिए जगह इतनी कम थी कि बच्चे पूरा उत्तर तक नहीं लिख पाए। इसलिए मिडलाइन परीक्षा में ऐसा इंतजाम किया गया है कि बच्चे पूरा उत्तर लिख सके।
मूल्यांकन के बाद सीजी पोर्टल में इंट्री, पूरे प्रदेश के स्कूलों की दिखेगी स्थिति
परीक्षा होने के बाद मूल्यांकन स्कूल के शिक्षक करेंगे। बच्चों के नाम सहित जिन विषयों में जितने नंबर पाए हैं उसकी एंट्री पढ़ई तुंहर द्वार के सीजी पोर्टल में की जाएगी। इससे यह होगा कि राज्यभर के सभी स्कूलों में बच्चों का स्तर किस तरह है यह कक्षावार एक साथ जानकारी मिल जाएगी। उस हिसाब से आने वाले शैक्षणिक सत्र में बच्चों की गुणवत्ता सुधार के लिए राज्य से नई प्लानिंग बनाई जाएगी। फिर उसे क्रियान्वित करेंगे।
संस्था असर की रिपोर्ट की वजह से इस तरह की परीक्षा
पहली से आठवीं तक के बच्चों की आंकलन परीक्षा इसलिए ली जा रही है कि देशभर में शिक्षा का स्तर पता लगाने हर साल असर संस्था सर्वे करती है। असर की रिपोर्ट में कक्षावार बच्चों की रिपोर्ट रहती है। जिसमें कक्षा पहली से लेकर आठवीं तक के बच्चों की विषयवार दक्षता का खुलासा किया जाता है। इसलिए परीक्षा में ही दक्षता आंकलन होने से अधिकारी इस रिपोर्ट की वास्तविकता भी पता लगा सकेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए ही नया पैटर्न तैयार किया गया। परीक्षा के बाद उसका मूल्यांकन शिक्षक ही करेंगे। उसकी एंट्री सीधे सीजी पोर्टल में की जाएगी।