छत्तीसगढ़ राज्य के नव घोषित जिले मानपुर मोहला में विशेष प्रजाति के केले

त्वरित ख़बरें - किसान केरल से लेकर आया है पौधे, बोला-फसल लगने से पहले आ जाती है डिमांड, मुनाफा भी अच्छा

छत्तीसगढ़ राज्य के नव घोषित जिले मानपुर मोहला के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बसा मानपुर गांव विशेष प्रजाति के केले के लिए भारत के नक्शे में पहचान बना रहा है। यहां के केले की सबसे अधिक डिमांड चिप्स और सेरेलेक बनाने को लेकर है। यहां बिज्जू नाम का किसान केरल राज्य से विशेष प्रजाति के केले के पौधे लाकर पिछले तीन साल से खेती कर रहा है। उसका कहना है कि उसे अपनी फसल को बेचने के लिए बाजार भी नहीं जाना पड़ता है। व्यापारी खुद उसके पास आकर अच्छे दाम में केला खरीद लेते हैं।

किसान बिज्जू जॉन ने बताया कि वह केरल का रहने वाला है और साल 2000 में वह मानपुर आया था। यहां कुछ साल रहने के बाद उसने पाया कि यहां की जलवायु केले की खेती के लिए अच्छी है। इसके बाद उसने साल 2011 में कुछ एकड़ खेती की जमीन को खरीदा। इसके बाद वह केरल गया और एटेकेयर और नेत्रपेडम प्रजाति के केले के पौधे लेकर आया। उसने साल 2018 में पहली बार इस केले की खेती को किया। अच्छी फसल मिलने पर उसका साहस बढ़ा। इतना ही नहीं बाजार में उसके केले को अच्छे दाम पर हाथों हाथ लिया गया। इसके बाद से वह लगातार इस केले की फसल को लगा रहा है।

उसने बताया कि फसल लगने से पहले ही दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव और दूसरे राज्यों के व्यापारियों की डिमांड उसके पास आ जाती है। इससे उसे सामान्य केले से दो से तीन गुना अधिक मुनाफा हो रहा है। बिज्जू का कहना है कि वह और भी जमीन की तलाश में है, जिससे वह अधिक बड़े पैमाने पर इस खेती को बढ़ा पाए। इस केले की खेती के कारण क्षेत्र में उसकी अलग पहचान बन गई है।

70-80 रुपए प्रति किलो के भाव से बिकता है केला

बिज्जू का कहना है कि सामान्य केला थोक के भाव में अच्छा रेट मिलने के बाद भी 5-10 रुपए किलो अधिकतम बिकता है। उसके केले का आकार और लंबाई दोनों ही अच्छी है। इस वजह से सेरेलेक बनाने वाली कंपनी उसके केले को खरीद रही हैं। चिप्स बनाने वाले व्यापारियों में भी उसके केले की काफी डिमांड है। उसका केला खेत से ही 70-80 रुपए प्रति किलोग्राम के रेट से बिक जा रहा है। इससे उसे काफी अच्छा मुनाफा हो रहा है।

हर साल लगाना पड़ता है नया पौधा

किसान ने बताया कि विशेष प्रजाति के केले की खेती के लिए हर साल नया पौधा रोपना पड़ता है। एक केले का पौधा एक साल में फल देने के बाद दूसरी बार फल नहीं देता है। इसलिए छह महीने के अंतर में वह नए पौधे रोप देते हैं, जिससे पहली फसल निकलने के बाद कुछ ही महीनों में दूसरी फसल लेने लायक फिर से नया पौधा तैयार हो सके।

जलवायु का मिल रहा फायदा

बिज्जू का कहना है कि छत्तीसगढ़ के मानपुर और केरल की जलवायु काफी मिलती जुलती है। इसके कारण यहां केरल के विशेष प्रजाति के केले का अच्छा उत्पादन हो रहा है। उसको देखकर अब क्षेत्र के अन्य किसान भी इस केले की खेती करना शुरू कर रहे हैं। इससे उनकी भी आर्थिक संपन्नता बढ़ी है।

इस केले में है अधिक पौष्टिकता

राजनांदगांव के व्यापारी रज्जू जान का कहना है मानपुर के केले में पौष्टिकता और मिठास दोनों अधिक है। लोग इस केले को काफी अधिक पसंद कर रहे हैं। इसके साथ ही वह इस केले को खरीदकर दूसरे राज्यों में भी भेजता है। डिमांड से कम उत्पादन होने के चलते वह सीधे किसान के पास आते हैं और केला खरीदकर ले जाते हैं।