2/अगस्त/2022
रायपुर के खम्हारडीह इलाके में नगर निगम ने कार्रवाई की। एक तालाब की सुंदरता बढ़ाने के मकसद से दर्जनों परिवारों के घर तोड़ दिए गए। सुबह शुरू हुई कार्रवाई आधी रात तक जारी रही। लोग अपने घर टूटते देखते रहे, दिन में सियासी हंगामा करने वाले नेता भी अपने घर चले गए। रात को जब आशियाना उजड़ रहा था, तब गरीबों के साथ किसी पार्टी का कोई नेता मौजूद नहीं था
सड़क पर रात बिताऊंगी, क्या करूंगी ?
इस बस्ती में अपने 5 साल के बेटे के साथ रहने वाली युवती ने बताया कि वह किराए के मकान में रह रही थी। यहां दूसरा मकान सिर्फ उन लोगों को दिया जा रहा है, जिनका यहां खुद का मकान था। मुझे तो बेदखल कर दिया गया। अब मैं रात को कहां आसरा लूं समझ नहीं आ रहा, सारा सामान सड़क पर बिखरा हुआ है। मुझे तो घर भी नहीं मिलेगा और रातों-रात किराए का.. आज रात सड़क पर ही बिताउंगी (यह कहते हुए युवती का गला भर आया), मेरे बच्चे की तबीयत भी खराब है सुबह से मैंने और उसने कुछ नहीं खाया।
बच्चे के साथ बेघर हुई युवती
स्मार्ट सिटी में गरीब को जीने का हक नहीं
बस्ती के युवक बबलू राव ने कहा कि हम यहां 50 सालों से रह रहे हैं। टैक्स पटाते हैं हमारे पास पट्टा है, मगर इसके बावजूद हमें रातों-रात हटाया जा रहा है। क्या स्मार्ट सिटी बनाए जाने वाले शहर रायपुर में गरीबों को रहने का हक नहीं है। आधी रात को लोग परेशान हैं। पुलिस और नगर निगम के अधिकारी हमारे साथ दादागिरी कर रहे हैं।
बस्तीवालों का कहना है कि हमें वक्त मिल जाता तो हम खुद बस्ती छोड़ देते।
कारोबारी ने खिलाए पैसे
बस्ती में रहने वाले युवक नीरज राव ने दावा किया कि बस्ती से लगकर एक कारोबारी का बड़ा प्लॉट है, लोगों ने बताया कि इस कारोबारी का सियासी दिग्गजों के साथ उठना बैठना है। अपने प्रभाव में प्रशासन के अमले को लेकर उसने यह बस्ती खाली करवाई है। नीरज ने कहा कि पैसे खिलाकर गरीबों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। हमें थोड़ी मोहलत दे दी जाती तो हम खुद इस बस्ती को छोड़ कर चले जाते।
घर की औरतें देर रात तक सामान शिफ्ट करती रहीं
नई बहू बेघर, फ्रिज टूटा
तोड़फोड़ की इस कार्रवाई के दौरान एक घर में फ्रीज टूट गया। 2 महीने पहले ही एक युवक की शादी हुई थी। नई नवेली बहू घर बसाने की उम्मीद में आई और उसे नगर निगम ने विस्थापित कर दिया।
दिनभर पुलिस और प्रशासन से लड़ाई, रात में टूट गया घर।
एक कमरे में हम रहें या सामान रखें
नगर निगम ने खम्हारडीह इलाके की इस बस्ती को खाली करके कचना में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने फ्लैट लोगों को दिए हैं। एक कमरे के इस फ्लैट में गुजारा कैसा हो कैसे होगा इस बात की चिंता तमाम परिवारों की है। युवक नीरज राव ने कहा कि सामान और 3-4 लोगों की फैमिली यहां घरों में रह रही थी उनको सिर्फ एक कमरा दिया गया है .. हम सामान कमरे में रखकर सड़क पर रहने को मजबूर हो गए हैं। नगर निगम ने हमें ठीक व्यवस्थापन नहीं दिया। आगे हमारे साथ क्या होगा कुछ तय नहीं।
लोगों का सामान देर रात तक यूं ही रहा
सूरज निकलने से पहले बस्ती ढेर
देर रात तक नगर निगम के कर्मचारी और अधिकारी पुलिस की मौजूदगी में बुलडोजर बस्ती पर चलाते रहे। मीडिया से बात करने में बचते हुए अफसरों ने बड़ी मुश्किल से बताया कि बस्ती तोड़कर तालाब के किनारे सौंदर्यीकरण करेंगे, पाथवे बनाएंगे लाइट लगाएंगे, ताकि लोग टहल सकें।
मोहलत ना दी जाने की बात पर अधिकारियों ने कहा कि 3 महीने से बस्ती को व्यवस्थापित करने की जानकारी लोगों को दी गई थी, मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा था। हाईकोर्ट ने ही विस्थापितों को शिफ्ट करने कहा, इसलिए कार्रवाई हुई, सभी लोगों को जानकारी थी? मगर लोग जानबूझकर बस्ती खाली नहीं कर रहे थे। लोगों को सामान शिफ्ट करने में नगर निगम ने मदद दी। सड़कों पर आवारा मवेशियों को पकड़ने वाले वाहन में लोगों का सामान लादकर कचना पहुंचाया गया।
दिनभर से भाजपा के नेताओं ने कार्रवाई का विरोध किया, रात में जब बुलडोजर मकान तोड़ रहे थे। बस्ती वालों के साथ किसी राजनीतिक दल का कोई नेता मौजूद नहीं था
दिन में हुआ सियासी ड्रामा
इलाके के भाजपा पार्षद रोहित साहू, स्थानीय भाजपा नेता संजय श्रीवास्तव दिन में इस इलाके में पहुंचे थे। उन्होंने पुरजोर तरीके से कार्रवाई का विरोध किया। निगम की इस कार्रवाई को गलत ठहराया । पुलिस ने इन नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद शाम होते-होते स्थानीय जनप्रतिनिधि इस कार्रवाई से खुद को अलग कर गए, और आधी रात गरीबों के घर तोड़ दिए गए।