पर्यावरण को पॉलीथिन से मुक्त करना है तो उसका विकल्प देना होगा। इस सोच के साथ राजधानी के डा. राधाबाई शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय ने कपड़े का थैला बनाने का काम हाथ में लिया है।
कॉलेज की छात्राएं कॉलेज में और अपने घरों पर कपड़े की थैलियां सिल रही हैं। कॉलेज में इसके लिए छह मशीनें लगाई गई हैं। बच्चों से कहा गया है कि अनुपयोगी कपड़े यहां लाकर दे सकते हैं जिनसे थैले बन सके। ये 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर निशुल्क बांटे जाएंगे।
पॉलिथिन से मुक्ति उद्देश्य
1986 में शुरू हुआ यह कालेज मठपारा में स्थित है। यहां लगभग 1200 छात्राएं पढ़ती हैं। यहां कला, विज्ञान और वाणिज्य की पढ़ाई होती है। पढ़ाई के अलावा यहां कई तरह की समाजोपयोगी गतिविधियां चलाई जाती हैं। प्राचार्य अलका श्रीवास्तव ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य जागरुकता पैदा करना है।
हम चाहते हैं कि लोग पॉलीथिन की जगह कपड़े की थैलियों का उपयोग करें ताकि पॉलिथिन की थैलियां जमीन के भीतर जाकर पर्यावरण को नुकसान न पहुंचा सके। इसके अलावा पॉलिथिन से मवेशियों को भी खासा नुकसान पहुंचता है। कपड़े की थैलियों का चलन बढ़ेगा, तो उन्हें भी फायदा होगा।
कॉलेज परिसर में ही सिलाई हो रही
कालेज की पर्यावरण समिति की संयोजिका डा. प्रीति श्रीवास्तव ने बताया कि कालेज परिसर में ही श्रमदान से थैलियां तैयार की जा रही हैं। इसके लिए प्राध्यापकों ने भी कपड़ा मुहैया कराया है। छात्राओं के अलावा कालेज में काम करने वाली महिलाएं भी थैलियां सिल रही हैं।
छात्राओं और महिला कर्मचारियों को बड़ी संख्या में थैलियां सिलने पर पारिश्रमिक भी दिया जा रहा है। पारिश्रमिक देकर कालेज के प्राध्यापकों ने यहां बड़ी संख्या में थैलियां सिलवाई हैं जिन्हें वे निजी तौर पर भी बांटेंगे। डा. श्रीवास्तव ने बताया कि यह अभियान साल भर चलाया जाएगा।
अभियान में मिल रहा सहयोग
अभियान में डा. रूपा सल्होत्रा, डा. चंचल चतुर्वेदी, डा. श्वेता अग्निवंशी, अतुल त्रिवेदी भी सहयोग कर रहे हैं। पूर्णत: छात्रा केंद्रित इस महाविद्यालय को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन समिति ने बी डबल प्लस ग्रेड प्रदान किया है। थैलियाें का वितरण आसपास के किराना दुकान वालों, सब्जी वालों के बीच भी किया जाएगा। उनसे कहा जाएगा कि वे ग्राहकों को इन थैलियों में सामान दें और पॉलिथिन की जगह इन्हीं थैलियों में सामान ले जाने के लिए प्रोत्साहित करें।