रायपुर २४ अप्रैल
छत्तीसगढ़ के सभी निकायों में खाली पड़ी और जर्जर हो रही दुकानों और भवनों को (अचल संपत्तियों) को कम दाम में बेचने की तैयारी है। इन संपत्तियों के ऑफसेट मूल्य को 30 प्रतिशत कम करने का निर्णय लिया गया है। यानि कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार संपत्ति का जो मूल्य होगा, उसमें 30 फीसदी की कमी करके उसका ऑफसेट मूल्य या बेस प्राइज तय किया जाएगा।
इसके बाद इन संपत्तियों की नीलामी की जाएगी। हालांकि, नीलामी से पहले इन संपत्तियों के ऑफसेट मूल्य को 30 प्रतिशत कम करने के प्रस्ताव को निकायों के सामान्य सभा से पारित कराना होगा। नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के सभी निकायों को इसे तेजी से अमल में लाने के लिए कहा है।
विभागीय अफसरों का कहना है कि निकायों की इन अचल संपत्तियों में 90 फीसदी दुकानें ही हैं। संपत्तियों के बेस प्राइज कम होने का सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा। वे ज्यादा से ज्यादा संख्या में नीलामी में भाग ले सकेंगे। साथ ही संपत्तियों की बिक्री से निकायों की आमदनी भी बढ़ेगी। निकायों को एकमुश्त राशि मिलेगी। इससे निकायों में विकास के कामों में तेजी आएगी।
निकायों की बढ़ेगी आमदनी
निकायों की आमदनी बढ़ाने और लोगों के हित में लगातार फैसले कर रही है। 30 प्रतिशत कम रेट में बेस प्राइज तय कर अचल संपत्ति के नीलामी के अलावा सरकार ने निकायों की जमीनों को फ्री होल्ड करने का फैसला भी किया है।
इसलिए लिया गया फैसला
प्रदेश में 168 निकाय हैं। तकरीबन सभी निकायों ने कुछ न कुछ निर्माण करवाए हैं और इसे बेचने के लिए बाजार में रखा, लेकिन ज्यादातर जगह सालों से दुकानें बिकी ही नहीं हैं। अब ये भवन न सिर्फ जर्जर हो रहे हैं, बल्कि इनमें लगे सामान भी चोरी हो रहे हैं।
हाल ही में महासमुंद में एक ऐसा मामला भी सामने आया था कि जिसमें हाउसिंग बोर्ड की एक पूरी काॅलोनी का एक-एक ईंट चोरी हो गया था। ऐसा निकायों द्वारा बनाए गए भवनों के साथ न हो और न्यूनतम मूल्य मिल जाए। तीन साल पहले निकायों के लिए ऐसा ही आदेश जारी हो चुका है।
ऐसे होगी नीलामी
नगरीय निकाय अपने क्षेत्र की ऐसी अचल संपत्तियों को चिन्हित करेगा, जो वर्षों से खाली पड़ी हैं या जर्जर हो रही हैं। सबसे पहले इन संपत्तियों का बेस प्राइज तय किया जाएगा। गाइडलाइन से संपत्तियों का जो मूल्य होगा, उसमें 30 फीसदी कमी करके बेस प्राइज तय किया जाएगा।
ऐसे समझें पूरी प्रक्रिया
छत्तीसगढ़ में यदि किसी संपत्ति का मूल्य 100 रुपए है इसका मूल्य 70 रुपए हो जाएगा। यह संपत्ति का बेस प्राइज होगा। संपत्ति की नीलामी में भाग लेने वाले लोगों को अब इससे ज्यादा रेट डालना होगा। इसमें जिसका रेट सबसे ज्यादा होगा, उसे ये संपत्ति बेच दी जाएगी।
कीमतें कम होने से लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
- बेस प्राइज कम होने से नीलामी में भाग लेने वालों की संख्या बढ़ेगी।
- सालों से खाली पड़े और जर्जर हो रहे भवनों की बिक्री हो सकेगी।
- संपत्तियों की बिक्री से नगरीय निकायों को एक मुश्त राशि मिलेगी।
- इससे बेरोजगार व जरूरतमंद लोग भी दुकान खरीद सकेंगे।
- प्रदेश के सभी शहरों में आर्थिक गतिविधि में तेजी आएगी।
- मूल्य कम होने से संपत्ति का वास्तविक मूल्य भी कम ही है।