रायपुर २४ अप्रैल
छत्तीसगढ़ आम का बड़ा बाजार है, मगर इस साल थोक फल बाजार से लेकर गली-मोहल्लों तक की दुकानों में पर्याप्त मात्रा में आम उपलब्ध नहीं हैं। जो आम आ भी रहे हैं उनसे मिठास गायब है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में पिछले वर्ष 459 मीट्रिक टन आम की पैदावार हुई, मगर इस साल किसानों को 25 प्रतिशत भी पैदावार की उम्मीद नहीं है। इसकी वजह मौसम है।
आम की स्थिति देखने भास्कर टीम रायपुर, बेमेतरा, दुर्ग, महासमुंद पहुंची। साथ ही अंबिकापुर, जशपुर और रायगढ़ के किसानों से बातचीत की। इस दौरान सामने आया कि दिसंबर-जनवरी में राज्य में रुक-रुककर अच्छी बारिश होती रही, जिसके चलते बौर को नुकसान पहुंचा। फल लग नहीं पाए।
जो लगे, उन पर रही-सही कसर तापमान के उतार-चढ़ाव ने पूरी कर दी। इससे बचे आम से व्यापारियों को कुछ प्रतिशत कारोबार की उम्मीद थी, मगर 21-22 अप्रैल को चली तेज आंधी से काफी आम झड़ गए। किसान इन्हें बीनकर मंडियों में पहुंचा रहे हैं क्योंकि ये जल्द खराब हो जाते हैं। मंडी में किसानों को एक किलो कच्चे आम का दाम सिर्फ 8-10 रुपए ही मिल रहे हैं। व्यापारियों को कहना है कि अभी आंध्रप्रदेश का पैरी, बैगनफल्ली, ओडिशा से सुंदरी आम आ रहा मगर, मिठास नहीं। मई में उत्तर प्रदेश का लंगड़ा आएगा।
दुर्ग: उम्मीदों पर मौसम की मार
धौराभांठा में अनिल शर्मा 25 एकड़ में आम की खेती करते हैं। आम के पेड़ हरे-भरे हैं, मगर फल बहुत कम है। आम की बौर भी खराब हो चुकी हैं। इस बार सिर्फ 25% पैदावार थी, आंधी में उसे भी नुकसान हो गया। उधर, मुश्किल यह है कि जो आम लगे हैं वे आकार में छोटे हैं। इन्हें अच्छे दाम नहीं मिल रहे।
जशपुर: बारिश का पानी जरूरी
विधायक यूडी मिंज भी कुनकुरी में आम की खेती करते हैं। उनका कहना है कि बौर आती है तो एक बार बारिश का पानी पड़ना जरूरी है ताकि इससे शहद जैसा तरल धुल जाए। इस साल ऐसा नहीं हुआ। दूसरा, कीटों से बचाने पेड़ों में ट्रीटमेंट भी जरूरी है, यह भी आम की कम पैदावार की एक वजह है।
एक्सपर्ट व्यू
मौसम अनुकूल नहीं रहा
इस साल छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश में आम की पैदावार कम हुई है। इसकी दो बड़ी वजह है। पहला- मौसम में बदलाव, नवंबर-दिसंबर तक बारिश का होना और बादल छाए रहने की वजह से पेड़ों को पर्याप्त धूप नहीं मिलने के चलते फसल को नुकसान हुआ है। दूसरा-आम के बौर में ऑक्सीन हार्मोन निकलता है, इस वजह से ये फल देते हैं। बादल छाए रहने के कारण इस बार वह प्रक्रिया ठीक से नहीं हो पाई।
-डॉ. घनश्याम साहू, फल वैज्ञानिक, इंदिरा गांधी कृषि विवि
इस साल कम आ रहे आम
इस साल आम की आवक अपेक्षाकृत बीते वर्षों की तुलना में कम है। अभी आंध्रप्रदेश से ज्यादा आम आ रहा है। छत्तीसगढ़ का आम अभी नहीं आया है। इस बार ग्राहकों ने मिठास कम होने की भी शिकायत की, इसकी वजह से भी बिकवाली कम है। हालांकि जुलाई तक आम की मांग बनी रहती है।