रायपुर। जिस कक्षा में स्कूली बच्चे पढ़ रहे हैं उसी कक्षा के स्तर के वह लायक हैं या नहीं। इसका आंकलन करने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश में नवा जतन कार्यक्रम की शुरूआत की है। अब इस योजना का असर बच्चोंमें देखने को मिल रहा है । राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने बच्चों का मूल्यांकन करके ऐसे बच्चों को चिन्हांकित किया था जो कि कोरोना काल में लर्निंग लास (सीखने की क्षमता में बुरा प्रभाव) के शिकार हो चुके हैं। ऐसे में बच्चो के शिक्षा गुणवत्ता में सुधार करने के लिए उनको उपचारात्मक शिक्षा देने के बाद उनके शिक्षा स्तर में सुधार होने लगा है।
प्रारंभिक मूल्यांकन को कहा - बेसलाइन असेसमेंट
बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा स्तर को जानने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने बच्चों का बेसलाइन टेस्ट किया था। जहां केवल 50.67 फीसद विद्यार्थी अपनी कक्षा स्तर पर थे। इसके बाद मिडलाइन टेस्ट में 74.96 फीसद बच्चे अपने कक्षा के स्तर पर पहुंच गए हैं। अब अप्रैल में एंडलाइन टेस्ट होना है। इससे बच्चों के शिक्षा स्तर के अंतिम आंकड़े मिल पाएंगे।
नवाजतन से बच्चों में हुआ सुधार
स्कूलों के नियमित लगने और उपचारात्मक शिक्षण नवाजतन जैसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों के प्रदर्शन में आए उन्नयन को देखा जा सकता है।