जगदलपुर (बस्तर) | विश्व प्रसिद्ध और ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के इतिहास में एक स्वर्णिम एवं अभूतपूर्व अध्याय जुड़ने जा रहा है। शुक्रवार को देश की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जगदलपुर के ऐतिहासिक 'सिरहासार' में आयोजित होने वाले पारंपरिक मुरिया दरबार में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएंगी। बस्तर की सदियों पुरानी समृद्ध परंपरा और जनजातीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के इस भव्य मंच पर शिरकत करने वाली वे देश की पहली राष्ट्रपति होंगी।
पारंपरिक जन-प्रतिनिधियों से करेंगी आत्मीय संवाद
इस गौरवशाली अवसर पर महामहिम राष्ट्रपति बस्तर अंचल के पारंपरिक सामाजिक संरक्षकों और प्रतिनिधियों से सीधी चर्चा करेंगी। वे अंचल के:
मांझी-चालकी
नाइक-पाइक
मेंबर-मेंबरिन
जैसे जमीनी प्रतिनिधियों से रूबरू होकर उनसे आत्मीय संवाद करेंगी। बस्तर की अनूठी सांस्कृतिक धरोहर और जनजातीय पहचान के सम्मान में यह कदम एक सशक्त प्रतीक बनेगा।
भव्य स्वागत और विशेष तैयारियां
इस अविस्मरणीय क्षण को ऐतिहासिक बनाने के लिए बस्तर दशहरा समिति और स्थानीय प्रशासन ने व्यापक और भव्य तैयारियां की हैं। सिरहासार भवन पहुँचने पर राष्ट्रपति का स्वागत बस्तर की लोक-संस्कृति, पारंपरिक वाद्यों और अनूठे प्रतीकों के साथ किया जाएगा।
पूरे बस्तर अंचल में उत्साह का माहौल
बस्तर की इस गौरवमयी परंपरा में देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्तित्व की सहभागिता को लेकर स्थानीय ग्रामीणों, आदिवासियों और प्रशासनिक हलकों में भारी उत्साह और हर्ष देखा जा रहा है।
संपादकीय टिप्पणी (बस्तर दशहरा का महत्व):
बस्तर का दशहरा अपनी 75 दिनों तक चलने वाली अनूठी रस्मों और बिना रावण दहन के मनाए जाने वाले सांस्कृतिक स्वरूप के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। मुरिया दरबार इस उत्सव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहाँ समस्याओं का समाधान और लोकतांत्रिक संवाद की परंपरा सदियों से चली आ रही है।