त्वरित ख़बरें - राहुल ओझा डोंगरगढ़ :- डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत पिपरिया निवासी बिरजू कंवर के घर उस वक्त मातम पसर गया जब उनकी पत्नी शालिनी कंवर की मृत्यु सामान्य प्रसव के बाद हो गई। पूरा मामला इस प्रकार है 27 जनवरी 2025 को बिरजू कंवर अपनी गर्भवती पत्नी शालिनी कंवर को लेकर मुरमुंदा उप स्वास्थ्य केंद्र जांच के लिए दोपहर 12:00 बजे जाते हैं। चिकित्सकों द्वारा जांच उपरांत बिरजू को पत्नी शालिनी की सामान्य प्रसव होने की संभावनाओं की जानकारी देते हुए उसे उप स्वास्थ्य केंद्र मुरमुंदा में भर्ती करने की सलाह देते हुए शालिनी कंवर को प्रसव के लिए भर्ती भी कराया जाता है। आगे पति बिरजू कंवर ने बताया 3:25 पर शालिनी कंवर ने एक स्वस्थ नवजात बच्ची को जन्म दिया मगर प्रसव के दौरान पत्नी शालिनी का रक्त स्राव अधिक हो रहा था जो डॉक्टर के तमाम प्रयासों पर भी रुक नहीं रहा था। अधिक रक्तस्राव होने की वजह से आधे घंटे में मरिज की हालत नाजुक होती गई ।मरीज की नाजुक हालत को देखते हुए उप स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों के द्वारा आनंन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगढ़ रेफर किया गया। मगर मुरमुंदा उप स्वास्थ्य केंद्र में मरीजो के लिए जो वाहन प्रशासन उपलब्ध करता है। वह वाहन मुरमुंदा अस्पताल में थी ही नहीं। इधर मरीज की हालत बिगड़ती चली गई परिजनों के काफी खोजने व मस्क्त करने के बाद आधा घंटा लेट से वाहन नसीब हुआ और शालिनी कंवर को डोंगरगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर परिजन पहुंचे जहां कुछ समय के पश्चात डॉक्टर ने शालिनी कंवर को मृत घोषित कर दिया। इस प्रकार ग्राम पिपरिया निवासी बिरजू कंवर का हंसता-खेलता गरीब आदिवासी परिवार उजड़ गया और शालिनी कंवर व उसकी नवजात बेटी को मांँ की ममता से हमेशा-हमेशा के लिए वंचित कर दिया।
शालिनी कंवर की मृत्यु का मुख्य कारण समय पर अस्पताल में वाहन नहीं मिलाना बताया जा रहा है वर्तमान सरकार द्वारा प्रसव पर एक स्लोगन दिया गया है "मायके हो या ससुराल में जज की करो अस्पताल में" डोंगरगढ़ स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त संख्या में वाहन उपलब्ध है मगर विभाग के कई अधिकारी कर्मचारी शासकीय वाहनों का उपयोग अपने निजी कार्यों के लिए करते रहते हैं जिसका खामिया जा क्षेत्र की जनता को अपनी जान से हाथ धो कर भी चुकाना पड़ता है वाहन न मिलने की वजह से ग्राम पिपरिया निवासी शालिनी कंवर की मौत का मामला गरमाया हुआ है ।परिजन दोषीयों पर कार्यवाही की मांग पर अड़े हुए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटना किसी के साथ ना घटे संसार में आते ही एक बेटी को अपनी मां से जुदा ना होना पड़े। डोंगरगढ़ स्वास्थ्य विभाग के वाहनों के दुरुपयोग का एक पुराना वीडियो हमारे हाथ लगा है उसी के साथ आपको छोड़ जाते हैं आप समझ सकते हैं सिस्टम अधिकारियों के आगे कितना बेबस है