‘हृदय और आत्मा को शुद्ध करने का सरल माध्यम है श्रीमद भागवत कथा’ !!

त्वरित ख़बरें:-माता-पिता अपनी संतान को प्रहलाद और ध्रुव की तरह शिक्षा-संस्कार देः पं. महेश्वर, - गुढ़ियारी में आयोजित श्रीमद भागवत कथा श्रृंखला में आज होगा कृष्ण जन्म................

रायपुर:       ‘भगवान श्रीकृष्ण के कमल पद चिह्न भक्तों के जीवन से अशुभ घटनाओं को नष्ट कर देते हैं और बड़ा सौभाग्य लाते हैं। भागवत कथा मनुष्य के हृदय और आत्मा को शुद्ध करने में सहायता करती है। विशेषकर जो मनुष्य एकादशी को भागवत कथा सुनता है, उसे दीर्घायु प्राप्त होती है। वहीं निष्काम भाव से भक्ति करने वालों को भगवान सहज रूप में मिल जाते हैं, आवश्यकता केवल मन से परमात्मा की पूजा-अर्चना करने की है’। 

यह ज्ञानामृत, कथा व्यास पं. महेश्वर प्रसाद तिवारी ने गुढ़ियारी में चल रही श्रीमद भागवत कथा में बांटे। बताते चलें कि, स्व. मानूबाई शुक्ला (उरला वाले) की स्मृति में जीवन शुक्ला के निज निवास डी-17, सेक्टर-1, गोंदवारा रोड एकता नगर गुढ़ियारी में भागवत कथा आयोजित की जा रही है, जो 27 जुलाई तक चलेगी। यहां कथा व्यास पं. महेश्वर प्रसाद तिवारी के श्रीमुख से श्रीमद भागवत कथा का रसपान करते हुए गुढ़ियारी क्षेत्र के श्रद्धालु आनंदित हो रहे हैं। श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास पं. तिवारी ने प्रभु चरित्र और भक्त प्रहलाद की कथा सुनाई। उन्होंने बताया, जिसमें भगवान के चरित्र का वर्णन हो उसे ही भागवत कहते हैं। भागवत में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति ईश्वर के साक्षात दर्शन करता है। भगवान अपने भक्तों को सहज भाव से मिल जाते हैं। मनुष्य को हमेशा अपना मन पूरी तरह से साफ और शुद्ध रखना चाहिए, जिससे कि भगवान भी उस व्यक्ति से प्रसन्न हो जाए। आज माता-पिता का पहला कर्तव्य है कि वह अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें तथा उत्कृष्ठ शिक्षा दिलाएं। 

भक्त प्रह्लाद चरित्र की कथा सुनाते हुए पं. महेश्वर प्रसाद तिवारी ने बताया कि, असुर कुल के कीचड़ में प्रहलाद जैसा कमल खिला। भक्त प्रहलाद भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहते थे। पुत्र की ऐसी भक्ति को देख पिता हिरण्यकश्यप ने ही उसे जान से मारने की ठान ली परंतु प्रभु पर सच्ची निष्ठा और आस्था रखने के फलस्वरूप हिरण्यकश्यप प्रह्लाद का कुछ भी अनिष्ट नहीं कर पाए। भक्त प्रहलाद की रक्षा करने के लिए स्वयं भगवान को अवतार लेकर आना पड़ा। भगवान ने नरसिंह रूप धारण कर हिरण्यकश्यप का वध किया। कथासार यही है कि, सच्चे मन से यदि ईश्वर की आराधना की जाए तो निश्चित ही ईश्वर सहायता करते हैं। प्रत्येक माता-पिता को चाहिए कि, वे अपनी संतान को प्रहलाद और ध्रुव की तरह शिक्षा-संस्कार दें। कलयुग के वर्तमान समय में श्रीमद भागवत के चरित्र को मनुष्यों को हृदय में उतारकर मनन करने की आवश्यकता है। इससे पूर्व तीन दिनों तक कथा व्यास ने पहले, दूसरे व तीसरे दिन क्रमशः गोकर्ण, व्यास जन्म, कपिल कथा तथा नारायण दर्शन और ध्रुव चरित्र की कथा सुनाई। कथा श्रृंखला के पांचवें दिन गुरुवार को वामन चरित्र, रामावतार और श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई जाएगी। इस मंगल अवसर पर कथा सुनने के लिए अश्विनी शुक्ला, रमेश शर्मा, नारायण शुक्ला व प्रवीण शुक्ला समेत अन्य श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।