पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम रविवार को दुर्ग में थे। उन्होंने कहा कि आदिवासी अंचलों में आदिवासियों को कांग्रेस और भाजपा दोनों राजनीतिक पार्टियां प्रताड़ित करने का काम कर रही हैं। चुनकर आने वाले स्थानीय विधायक और सांसद भी मूकदर्शक की तरह बैठे हुए हैं। उन्होंने कहा कि कितना भी गंभीर और जरूरी विषय हो, लेकिन ये जिम्मेदार जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं होते।
उन्होंने राजनीतिक पार्टियों पर भी इसी प्रकार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में सर्व आदिवासी समाज एक राजनीतिक पार्टी के रूप में स्थापित होगा। वह 51 विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशी उतारेगा। इसमें 29 एसटी सीटें, 2 सामान्य और 20 ऐसी सीटें जहां 40 प्रतिशत से ज्यादा आदिवासी हैं।
नेताम ने कहा कहा कि 1996 में बने पेसा कानून के साथ ग्राम सभा के अधिकारों को लगातार दोनों सरकारें कम करने का काम कर रही हैं। यह लोकतंत्र के लिए सबसे अधिक खतरनाक है। धर्मांतरण के मुद्दे पर उन्होंने लचर कानून को दोषी बताया। उन्होंने कहा कि 24 घंटे एक पास्टर का घूमना गलत है। उन्होंने क्रिश्चियन के समर्पण के साथ काम करने को धर्मांतरण की बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि आरएसएस को चाहिए कि इसका मुकाबला सर्विस, सेवा जैसे कार्यों से करे।
दो बार केंद्रीय मंत्री और आयोग के अध्यक्ष रहे अरविंद नेताम
नेताम फरवरी 1973 से मार्च 1977 तक इंदिरा गांधी कैबिनेट में शिक्षा और समाज कल्याण राज्य मंत्री और पीवी नरसिम्हा राव कैबिनेट में जनवरी 1993 से 1996 तक कृषि राज्य मंत्री रहे। इसके अलावा आदिवासी आयोग के अध्यक्ष भी रहे। नेताम कांग्रेस से पांच बार कांकेर के सांसद रहे। ये अविभाजित मध्य प्रदेश के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। जून 2012 में कांग्रेस ने निलंबित कर दिया था। उन्होंने यूपीए की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी के खिलाफ पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और आदिवासी नेता पीए संगमा का समर्थन किया था। जनवरी 2017 में उन्होंने बीजेपी से निष्कासित पूर्व सांसद सोहन पोटाई के साथ जय छत्तीसगढ़ पार्टी का गठन किया था।